मैहर। मध्यप्रदेश नगरीय प्रशासन विभाग के अंतर्गत आने वाली नगर परिषद रामनगर की हालत भगवान भरोसे है। यहां स्थायी सीएमओ नहीं, सिर्फ प्रभारियों के सहारे नगर की सरकार चलाई जा रही है, जिसके चलते नगर का पूरा विकास प्रभावित हो गया है।
जानकारी के अनुसार नगर परिषद रामनगर लगातार कई महीनों से प्रभारी मुख्य कार्यपालन अधिकारियों की सरपरस्ती में चल रही है।
नतीजा - काम ठप, अधिकारी गायब -
सीएमओ के प्रभार में चलने के कारण अधिकारी अपनी मूल पदस्थापना वाले कार्यालय/आवास में ही निवास करते हैं। रामनगर में न तो समय पर बैठते हैं, न ही जनता की सुनते हैं। जिसके चलते -
- नगरीय निकाय का कोई भी काम समय पर नहीं हो पा रहा है
- जन्म-मृत्यु, भवन अनुमति, सफाई, पेयजल, स्ट्रीट लाइट जैसे रोजमर्रा के कामों के लिए जनता को चक्कर काटने पड़ रहे हैं
- शासन की योजनाएं कागजों में दम तोड़ रही हैं
फिर नया प्रभारी -
विगत दिनों अमरपाटन सीएमओ सुषमा मिश्रा से प्रभार लेकर अब उचेहरा सीएमओ प्रभात बड़खरे को नगर निकाय रामनगर का मुख्य नगर पालिका अधिकारी बनाया गया है। यानी फिर वही प्रभारी सिस्टम।
सवाल यह है कि जब अधिकारी का मूल चार्ज ही दूसरी जगह है, तो वह रामनगर को समय कैसे देगा? प्रभारी सीएमओ आएंगे, हस्ताक्षर करके चले जाएंगे, लेकिन जिम्मेदारी किसकी?
नगरवासियों ने नगरीय प्रशासन विभाग और कलेक्टर मैहर से मांग की है कि रामनगर नगर परिषद को स्थायी, नियमित रूप से निवास करने वाला सीएमओ दिया जाए, ताकि नगर के विकास को गति मिल सके और प्रभारियों के सहारे चल रही यह दुकानदारी बंद हो।
Leave A Reviews