
मैहर जिले अंतर्गत रामनगर क्षेत्र में वन्यजीवों की दस्तक से सनसनी फैल गई है। रामनगर थाना क्षेत्र की ग्राम पंचायत पुरैना के मौहारी डोंगरी टोला में मंगलवार देर रात करीब 11:30 बजे मैहर में जंगली हाथी का हमला हुआ। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से भटककर रिहायशी इलाके में पहुंचे एक विशाल जंगली हाथी ने बस्ती में घुसते ही जमकर तबाही मचाई। अचानक हुए इस खूनी हमले की चपेट में आने से 53 वर्षीय ग्रामीण कनछेदी यादव पिता गंगा यादव की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। रात के सन्नाटे में हुए इस अप्रत्याशित हमले से पूरे गांव में चीख-पुकार मच गई और ग्रामीण अपनी जान बचाने के लिए बदहवास होकर भागने लगे।

हाथी के गांव में प्रवेश करते ही अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ग्रामीण रजनीश यादव पिता ददुआ यादव ने सूझबूझ दिखाते हुए तुरंत एक ऊंचे पेड़ पर चढ़कर अपनी जान बचाई। वहीं दर्जनों अन्य ग्रामीण अंधेरे में ही पास के ऊंचे पहाड़ की ओर भागे और रातभर पत्थरों के बीच छिपकर अपनी जिंदगी की गुहार लगाते रहे। बस्ती में उत्पात मचाते हुए हाथी ने तीन पक्के मकानों को पूरी तरह ढहा दिया। मकानों की दीवारें गिरने से मलबे में दबकर दो बकरियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि घरेलू अनाज और सारा सामान मलबे में दबकर नष्ट हो गया।

ग्रामीणों का आरोप है कि रिहायशी इलाके के पास हाथी की मौजूदगी की जानकारी वन अमले को रात 10 बजे ही दे दी गई थी। इसके बावजूद समय पर कोई प्रशासनिक या वन सुरक्षा दल मौके पर नहीं पहुंचा। बारिश के कारण कच्चे रास्तों में भारी कीचड़ जमा होने और घुप अंधेरा होने के कारण विभागीय मदद पहुंचने में कई घंटों की देरी हुई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सूचना के तुरंत बाद अमला हरकत में आ जाता और हाथी को बस्ती की तरफ आने से रोक दिया जाता, तो शायद कनछेदी यादव की जान बचाई जा सकती थी।

वन विभाग के एसडीओ सिद्धार्थ दीपांकर ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि कॉलर आईडी लगे इस जंगली हाथी को ट्रेस कर लिया गया है। वर्तमान में हाथी की लोकेशन गोरसरी पहाड़ में दर्ज की गई है और बांधवगढ़ रिजर्व की विशेष ट्रैकर टीम लगातार उसके पीछे लगी हुई है। हालांकि, इस घटना ने पार्क प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। जब हाथी के गले में आधुनिक रेडियो कॉलर लगा हुआ था, तो वह रिजर्व सीमा से बाहर कैसे और कब निकल गया। समय रहते प्रबंधन को उसके मूवमेंट की सटीक जानकारी क्यों नहीं मिल पाई, यह जांच का विषय बन गया है।
घटना से गुस्साए ग्रामीणों और यादव समाज के लोगों ने मृतक का शव उठाने और पोस्टमार्टम कराने से साफ इंकार कर दिया है। ग्रामीण उचित मुआवजे, परिवार के एक सदस्य को सहायता और पक्के सुरक्षा इंतजामों को लेकर डीएफओ के सीधे आश्वासन पर अड़े हुए हैं। मौके पर तहसीलदार अनामिका सिंह, नायब तहसीलदार ललित धर्वे, रेंजर प्रफुल्ल त्रिपाठी सहित पुलिस, राजस्व और वन विभाग का भारी अमला तैनात है। प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों को समझाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है।
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