
कोलकाता. पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले सियासी पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। गुरुवार रात कोलकाता के भवानीपुर इलाके में उस समय भारी तनाव फैल गया, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद ईवीएम स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी करने पहुंच गईं। सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित स्ट्रॉन्ग रूम में ममता बनर्जी लगभग 4 घंटे तक रुकी रहीं।
विवाद की शुरुआत एक वीडियो से हुई, जिसे तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल 'X' पर साझा किया। टीएमसी का दावा है कि खुदीराम अनुशीलन केंद्र में बने स्ट्रॉन्ग रूम को बिना किसी सूचना के खोला गया और वहां संदिग्ध लोग मौजूद थे। पार्टी ने इसे "लोकतंत्र की हत्या" करार देते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी चुनाव आयोग के साथ मिलकर ईवीएम और बैलेट बॉक्स के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश कर रही है।
देर रात करीब 12:07 बजे स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर निकलने के बाद ममता बनर्जी ने मीडिया से बात करते हुए कहा:
"अगर ईवीएम लूटने या मतगणना में हेरफेर की कोई भी कोशिश हुई, तो हम जान की बाजी लगा देंगे। यह बंगाल है, यहां दिल्ली या बिहार जैसा खेल नहीं चलेगा। हमने कई जगहों पर गड़बड़ी देखी है, इसलिए मैं खुद यहां स्थिति का जायजा लेने आई हूं।"
उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वे मतगणना केंद्रों और स्ट्रॉन्ग रूम पर 24 घंटे कड़ी नजर रखें।
इन आरोपों पर चुनाव आयोग (ECI) ने तुरंत स्पष्टीकरण जारी किया। आयोग के मुताबिक:
पोस्टल बैलट की छंटाई: स्ट्रॉन्ग रूम के कॉरिडोर में चुनाव अधिकारी केवल पोस्टल बैलट की छंटाई (Sorting) कर रहे थे, जो कि एक निर्धारित प्रक्रिया है।
EVM सुरक्षित: आयोग ने स्पष्ट किया कि सभी ईवीएम (EVMs) पूरी तरह सुरक्षित और सीलबंद हैं। स्ट्रॉन्ग रूम को उम्मीदवारों के एजेंटों की मौजूदगी में ही सील किया गया था।
बीजेपी का पलटवार: बीजेपी नेताओं ने इन आरोपों को टीएमसी की 'हताशा' बताया है। पार्टी का कहना है कि ममता बनर्जी अपनी हार सुनिश्चित देखकर अब ईवीएम पर दोष मढ़ने का आधार तैयार कर रही हैं।
फिलहाल खुदीराम अनुशीलन केंद्र और सखावत मेमोरियल स्कूल के बाहर भारी पुलिस बल और केंद्रीय बल तैनात हैं। टीएमसी नेता कुणाल घोष और शशि पांजा ने भी केंद्र के बाहर धरना दिया, जिससे इलाके में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है।
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