
वॉशिंगटन डीसी. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर अपने आक्रामक तेवरों से अमेरिकी राजनीति में हलचल मचा दी है। ईरान के साथ जारी सैन्य तनाव के बीच, ट्रम्प प्रशासन ने 'वॉर पावर्स रिजोल्यूशन' के तहत संसद से युद्ध की मंजूरी लेने वाले प्रस्ताव को पेश करने से इनकार कर दिया है। व्हाइट हाउस का मानना है कि राष्ट्रपति को इसके लिए विधायी अनुमति की आवश्यकता नहीं है।
वियतनाम युद्ध के कड़वे अनुभवों के बाद 1973 में अमेरिका में 'वॉर पावर्स रिजोल्यूशन' लागू किया गया था। इस कानून के तहत:
राष्ट्रपति बिना संसद की मंजूरी के केवल 60 दिनों तक ही सेना का उपयोग कर सकते हैं।
समय सीमा खत्म होने पर या तो सेना वापस बुलानी पड़ती है या संसद से युद्ध जारी रखने का प्रस्ताव पारित कराना होता है।
विशेष परिस्थितियों में 30 दिन का अतिरिक्त समय मांगा जा सकता है।
चूंकि ट्रम्प ने 1 मार्च को ईरान पर हमले की घोषणा की थी, इसलिए यह 60 दिन की मियाद 1 मई 2026 को समाप्त हो रही थी।
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने गुरुवार को संसद में प्रशासन का पक्ष रखते हुए कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने तर्क दिया कि 7 अप्रैल को हुए अस्थायी युद्धविराम (Ceasefire) के कारण 60 दिनों की कानूनी घड़ी रुक गई थी। उनके अनुसार, वास्तविक युद्ध केवल 40 दिन चला है, इसलिए अभी समय सीमा समाप्त नहीं हुई है।
हेगसेथ ने युद्ध का विरोध करने वाले सांसदों और नागरिकों पर निशाना साधते हुए कहा:
"आज अमेरिका के लिए सबसे बड़ा खतरा ईरान नहीं, बल्कि देश के भीतर मौजूद युद्ध विरोधी तत्व हैं। इनमें कुछ डेमोक्रेट्स और कुछ रिपब्लिकन भी शामिल हैं जो सेना के मनोबल को कमजोर कर रहे हैं।"
ट्रम्प प्रशासन के इस कदम से डेमोक्रेट्स और कई उदारवादी रिपब्लिकन नाराज हैं। विपक्ष का आरोप है कि राष्ट्रपति कानून की अनदेखी कर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि 1 मई के बाद भी बिना संसदीय मंजूरी के सैन्य गतिविधियां जारी रहती हैं, तो यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच सकता है।
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