
ढाका: बांग्लादेश में खसरे (मीजल्स) का प्रकोप अब एक गंभीर स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, खसरे के लक्षणों के कारण चार और बच्चों की मौत हो गई है, जिससे 15 मार्च से अब तक मरने वालों का कुल आंकड़ा बढ़कर 280 हो गया है। देश के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो यह बीमारी एक बेकाबू महामारी का रूप ले सकती है।
डीजीएचएस द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में खसरे के 170 नए संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिसके बाद कुल संदिग्ध मामलों की संख्या 38,301 तक पहुंच गई है। वहीं, प्रयोगशाला जांच में अब तक 5,146 मामलों की पुष्टि (कन्फर्म) हो चुकी है। चिंताजनक बात यह है कि कुल मौतों में से 49 मौतें कन्फर्म खसरे से हुई हैं, जबकि 231 मौतों को संदिग्ध माना जा रहा है। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वर्तमान में सैकड़ों बच्चे अस्पतालों में भर्ती हैं, जो इस बीमारी की गंभीरता को दर्शाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बांग्लादेश सरकार को इस प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए तत्काल कार्रवाई करने की सलाह दी है। डब्ल्यूएचओ ने जोर देकर कहा है कि सभी नगर पालिकाओं में खसरे के टीके की दोनों खुराकों का कम से कम 95 प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करना अनिवार्य है। विशेषज्ञों का कहना है कि खसरा एक अत्यधिक संक्रामक बीमारी है, जहां एक संक्रमित मरीज 16 से 18 अन्य लोगों को बीमार कर सकता है। ऐसे में मजबूत निगरानी प्रणाली और त्वरित रिस्पॉन्स सिस्टम ही इस फैलाव को रोक सकता है।
कभी विकासशील देशों के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य का मॉडल माना जाने वाला बांग्लादेश का टीकाकरण कार्यक्रम (EPI) अब खुद संकट में है। 'द डेली स्टार' की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रीय टीकाकरण कवरेज जो 2010 से 2022 के बीच 85-92 प्रतिशत के करीब था, उसके 2025 तक गिरकर 60 प्रतिशत तक रह जाने की आशंका है। यह गिरावट पिछले एक दशक में सबसे न्यूनतम स्तर है। जानकारों का मानना है कि यह केवल एक अस्थायी रुकावट नहीं, बल्कि संस्थागत कमजोरी का परिणाम है, जो दशकों से बनी बनाई स्वास्थ्य व्यवस्था को ध्वस्त कर सकती है।
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