
रतलाम। जिले के बाजना विकासखंड के ग्रामीण इलाकों में मीजल्स (खसरा) के मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। बोरपाड़ा और रूपाखेड़ा गांवों में 10 बच्चों में खसरे के लक्षण पाए गए हैं, जिसके बाद विभाग की टीमें युद्ध स्तर पर राहत कार्यों में जुट गई हैं। शनिवार को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. संध्या बेलसरे ने प्रभावित क्षेत्रों का देर रात तक दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। राहत की बात यह है कि संक्रमित पाए गए सभी बच्चों की हालत अब नियंत्रण में बताई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह बात सामने आई है कि होली के त्यौहार के दौरान बाहर से आए कुछ बच्चों के माध्यम से संक्रमण फैलने की आशंका है, जिनमें से कुछ बच्चे अब वापस पलायन कर चुके हैं। इस मामले में कार्य में लापरवाही बरतने के आरोप में संबंधित एएनएम के खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव भी तैयार किया गया है। शुक्रवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. रितेश बजाज और जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील सहित विशेषज्ञों की टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर जमीनी हालातों का जायजा लिया।
संक्रमण को रोकने के लिए विभाग ने बाजना ब्लॉक के प्रभावित गांवों में 9 माह से 5 वर्ष तक के बच्चों के लिए विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया है। बच्चों को एमआर (MR) वैक्सीन की खुराक के साथ विटामिन-ए का घोल पिलाया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग ने निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत नोटिफिकेशन जारी कर घर-घर जाकर स्वास्थ्य शिक्षा देने और अतिरिक्त टीकाकरण सत्र आयोजित करने की विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है।
खसरे की गंभीरता को स्पष्ट करते हुए जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. वर्षा कुरील ने बताया कि यह एक तीव्र संक्रामक वायरल बीमारी है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, बहती नाक और आंखों का लाल होना शामिल है। संक्रमण के 10 से 14 दिनों के भीतर शरीर पर लाल-भूरे दाने उभरने लगते हैं, जिनसे पहले मुंह के अंदर 'कोप्लिक स्पॉट्स' (सफेद धब्बे) दिखाई दे सकते हैं। सीएमएचओ डॉ. संध्या बेलसरे ने नागरिकों को आश्वस्त करते हुए कहा है कि विभाग पूरी तरह सतर्क है और स्थिति फिलहाल काबू में है।
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