
भोपाल। मध्य प्रदेश शासन की महिला एवं बाल विकास मंत्री निर्मला भूरिया ने बुधवार को मंत्रालय में एक विशेष संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें 'पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन' और 'मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना' के तहत लाभ ले रहे 27 बच्चों को आमंत्रित किया गया था। मंत्री ने बच्चों से व्यक्तिगत रूप से मिलकर उनकी शैक्षणिक प्रगति, वर्तमान परिस्थितियों और भविष्य के लक्ष्यों पर विस्तृत बातचीत की। इस अवसर पर बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए उन्हें दीपावली के उपहार भी भेंट किए गए।
संवाद के दौरान मंत्री ने कहा कि महामारी में अपने माता-पिता या अभिभावकों को खोने वाले बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और बेहतर भविष्य की व्यवस्था करना सरकार का प्राथमिक कर्तव्य है। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि किसी भी बच्चे की पढ़ाई आर्थिक तंगी के कारण बाधित न हो। उन्होंने बच्चों से आत्मविश्वास बनाए रखने और उच्च लक्ष्य निर्धारित करने की बात कही। साथ ही आश्वस्त किया कि राज्य सरकार उनके समग्र विकास और आत्मनिर्भरता के लिए पूरी तरह साथ खड़ी है।
कोविड प्रभावित बच्चों के पुनर्वास के लिए केंद्र और राज्य सरकार द्वारा दो प्रमुख योजनाएं संचालित की जा रही हैं। केंद्र सरकार की पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन योजना के तहत 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर लाभार्थी के नाम से 10 लाख रुपए का कॉर्पस फंड तैयार किया जाता है। 18 से 23 वर्ष की आयु तक इसी फंड से मासिक वित्तीय सहायता मिलती है और 23 वर्ष की उम्र पूरी होने पर 10 लाख रुपए की एकमुश्त राशि सौंप दी जाती है। इसके अतिरिक्त आयुष्मान भारत योजना से 5 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य कवर और पहली से बारहवीं कक्षा तक 20 हजार रुपए वार्षिक छात्रवृत्ति दी जा रही है।
वहीं, मध्य प्रदेश शासन द्वारा संचालित मुख्यमंत्री कोविड-19 बाल सेवा योजना के जरिए पात्र बच्चों को 5 हजार रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जा रही है। इसके साथ ही राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत परिवारों को निशुल्क राशन और शासकीय शिक्षण संस्थानों में स्कूली शिक्षा से लेकर उच्च, तकनीकी, मेडिकल और विधि शिक्षा तक की पूरी पढ़ाई पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है।
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