
मुरैना जिले अंतर्गत जौरा कस्बे में पुलिस कार्रवाई के दौरान एक बेहद गंभीर और तनावपूर्ण घटना सामने आई है। बुधवार शाम चोरी के एक संदेही को पकड़ने पहुंची पुलिस टीम को देखकर मची भगदड़ के दौरान स्थानीय व्यापारी सूरज गुप्ता (38 वर्ष) जमीन पर गिर पड़े और मौके पर ही उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और स्थानीय व्यापारियों ने जौरा थाने का घेराव कर दिया और नेशनल हाईवे-552 पर चक्काजाम कर भारी हंगामा किया।
मामले की गंभीरता और बढ़ते जनआक्रोश को देखते हुए पुलिस अधीक्षक (SP) धर्मराज मीना ने त्वरित और कड़ा कदम उठाया है। एसपी ने जौरा थाना प्रभारी (SI) पंकज यादव सहित दबिश टीम में शामिल 5 अन्य पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से लाइन अटैच कर दिया है। लाइन अटैच किए गए अन्य पुलिसकर्मियों में प्रधान आरक्षक प्रवेंद्र तोमर, आरक्षक गिरजेश भार्गव, इसब खान, सुरेंद्र कंसाना और सत्यम शामिल हैं।
पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना के अनुसार, जौरा थाना पुलिस की टीम आवास कॉलोनी निवासी चोरी के आरोपी चीमा उर्फ छोटू कुशवाह को पकड़ने के लिए निकली थी। आरोपी के खिलाफ करीब आठ दिन पूर्व चोरी की वारदात का अपराध दर्ज था। पुलिस टीम जब जौरा के हॉस्पिटल रोड स्थित मस्जिद वाली गली में दबिश देने पहुंची, तो वहां कथित तौर पर जुआ खेल रहे लोगों में पुलिस को देखते ही अफरा-तफरी मच गई।
इसी भगदड़ के दौरान जौरा कस्बे में पीको-फॉल का काम करने वाले छोटे व्यापारी सूरज गुप्ता भागते समय असंतुलित होकर गिर पड़े और उनकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि पुलिस की अनियोजित और हिंसक कार्रवाई के कारण यह दुखद हादसा हुआ, जिसके लिए सीधे तौर पर पुलिसकर्मी जिम्मेदार हैं।
घटना की सूचना मिलते ही जौरा विधायक पंकज उपाध्याय भी व्यापारियों और परिजनों के समर्थन में धरने पर बैठ गए। आक्रोशित परिजन जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या (धारा 103 BNS) का मुकदमा दर्ज करने की मांग पर अड़े रहे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों से लंबी वार्ता की।
एडिशनल एसपी सुरेंद्र पाल सिंह ने बताया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच डीएसपी (DSP) स्तर के वरिष्ठ अधिकारी को सौंपी गई है। निष्पक्षता बनाए रखने के लिए गुरुवार सुबह मृतक सूरज गुप्ता के शव का पोस्टमॉर्टम मेडिकल बोर्ड द्वारा वीडियोग्राफी की निगरानी में कराया गया। रेडक्रॉस की ओर से अंत्येष्टि के लिए फौरी तौर पर 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई गई है तथा शासन से अतिरिक्त मुआवजा दिलाने हेतु प्रकरण तैयार कर भेजा जा रहा है। अधिकारियों की समझाइश और कार्रवाई के आश्वासन के बाद परिजन शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाने पर सहमत हुए।
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