
मनोरंजन डेस्क. जब भी अक्षय कुमार और प्रियदर्शन की जोड़ी पर्दे पर आती है, दर्शकों के जेहन में 'हेरा फेरी' और 'भूल भुलैया' जैसी कल्ट क्लासिक फिल्मों की यादें ताजा हो जाती हैं। लेकिन उनकी ताजा पेशकश 'भूत बंगला' इस विरासत को आगे ले जाने में नाकाम रही है। हॉरर, कॉमेडी और मिस्ट्री के नाम पर परोसी गई यह फिल्म टुकड़ों में तो हंसाती है, लेकिन एक संपूर्ण मनोरंजन के रूप में अधूरी रह जाती है।
फिल्म की कहानी मंगलपुर नामक एक श्रापित गांव के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां मान्यता है कि 'वधुसुर' नाम का राक्षस नई दुल्हनों को उठा ले जाता है। लंदन में रहने वाले अर्जुन आचार्य (अक्षय कुमार) अपनी बहन मीरा की शादी करने पुश्तैनी हवेली पहुँचते हैं। 500 करोड़ की संपत्ति और रोंगटे खड़े कर देने वाली घटनाओं के बीच अर्जुन को अपनी बहन और गांव को बचाना है। कहानी का प्लॉट दिलचस्प है, लेकिन इसका विस्तार बेहद कमजोर है।
अक्षय कुमार: अक्षय की कॉमिक टाइमिंग इस बार थोड़ी 'ओवर द टॉप' और बनावटी लगती है। वह अपनी पुरानी लय पकड़ने के लिए संघर्ष करते दिखते हैं।
राजपाल यादव: फिल्म के असली हीरो राजपाल यादव हैं। जब-जब वह स्क्रीन पर आते हैं, फिल्म में जान आ जाती है। उनकी नेचुरल कॉमेडी ही फिल्म का सबसे मजबूत पक्ष है।
परेश रावल और तब्बू: इन दिग्गज कलाकारों के पास करने को बहुत कम था। ऐसा लगता है कि इनके किरदारों को ठीक से लिखा ही नहीं गया।
वामिका गब्बी: लीड एक्ट्रेस होने के बावजूद वामिका को पर्याप्त स्क्रीन टाइम नहीं मिला और अक्षय के साथ उनकी केमिस्ट्री बेअसर रही।
प्रियदर्शन का निर्देशन इस बार बिखरा हुआ है। फिल्म का रनटाइम (करीब 3 घंटे) बहुत ज्यादा है, जो इसे उबाऊ बनाता है। VFX और म्यूजिक फिल्म के सबसे कमजोर पहलू हैं। 'भूल भुलैया' जैसे गानों का जादू यहाँ पूरी तरह गायब है; एक भी गाना ऐसा नहीं है जो दर्शकों की जुबान पर चढ़ सके।
अगर आप अक्षय कुमार के डाई-हार्ड फैन हैं या राजपाल यादव की कॉमेडी के लिए कुछ भी देख सकते हैं, तो एक बार इसे ट्राई कर सकते हैं। अन्यथा, यह फिल्म अपनी उम्मीदों के बोझ तले दबी हुई एक औसत दर्जे की हॉरर-कॉमेडी है।
रेटिंग: 2.5 / 5 स्टार
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