
इंदौर. मध्य प्रदेश के फार्मास्युटिकल उद्योग (दवा निर्माण क्षेत्र) पर वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव का काला साया मंडरा रहा है. मिडिल ईस्ट में जारी ईरान-इजराइल और अमेरिका के संघर्ष के कारण मध्य प्रदेश की फार्मा कंपनियों का करीब 1000 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट (निर्यात) ठप हो गया है. उद्योगपतियों का मानना है कि भले ही युद्धविराम की खबरें आ रही हों, लेकिन सप्लाई चेन को वापस पटरी पर लौटने में डेढ़ साल तक का समय लग सकता है.
100 कंपनियां और 190 देश प्रभावित
मध्य प्रदेश से हर महीने दवाइयों के 20,000 से अधिक कंटेनर दुनिया के 190 देशों में निर्यात किए जाते हैं. युद्ध के कारण समुद्री रास्तों में बढ़ा जोखिम और लॉजिस्टिक्स की समस्याओं ने प्रदेश की लगभग 100 बड़ी और मध्यम फार्मा कंपनियों के बिजनेस को बुरी तरह प्रभावित किया है. माल भेजने की लागत (Freight Cost) बढ़ने और शिपिंग रूट्स में बदलाव से कंपनियों का मुनाफा भी घटा है.
इंडस्ट्री का अनुमान: रिकवरी में लगेगा समय
इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (IDMA) के चेयरमैन परेश चावला के अनुसार, युद्धविराम एक राहत की खबर है, लेकिन इसका असर तुरंत नहीं दिखेगा.
"युद्धविराम के बाद स्थिति सामान्य होने में कम से कम 2 से 3 महीने लगेंगे, लेकिन इस दौरान हुए नुकसान की भरपाई और वैश्विक बाजार में फिर से विश्वास बहाली में 6 महीने से लेकर 18 महीने तक का समय लग सकता है."
दवाइयों की किल्लत और बढ़ती लागत
निर्यात रुकने से न केवल विदेशी मुद्रा का नुकसान हो रहा है, बल्कि उत्पादन चक्र भी बाधित हुआ है. यदि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो प्रदेश की कई इकाइयों में छंटनी या उत्पादन कटौती की नौबत आ सकती है.
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