
भोपाल: मध्य प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली में अब एक ऐतिहासिक बदलाव आया है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने एक नया सर्कुलर जारी किया है। इसके तहत अब किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले पुलिस को गिरफ्तारी के ठोस कारण लिखित रूप में देने होंगे। यह निर्देश सुप्रीम कोर्ट की एक महत्वपूर्ण रूलिंग के बाद जारी किए गए हैं। यदि पुलिस इन नियमों का पालन नहीं करती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 22(1) के तहत अपनी गिरफ्तारी का कारण जानना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है। एमपी पुलिस गिरफ्तारी नियम को अब इसी अधिकार के संरक्षण के लिए और अधिक प्रभावी बनाया गया है। पुलिस मुख्यालय के निर्देशानुसार, केवल मौखिक जानकारी देना अब पर्याप्त नहीं माना जाएगा। पुलिस को अनिवार्य रूप से गिरफ्तारी के आधार लिखित में देने होंगे।
नए एमपी पुलिस गिरफ्तारी नियम के तहत, गिरफ्तारी के आधार उस भाषा में होने चाहिए जिसे अभियुक्त समझ सके। लिखित जानकारी या तो गिरफ्तारी के वक्त दी जाए या फिर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने से कम से कम 2 घंटे पहले उपलब्ध कराई जाए। इस प्रक्रिया का विवरण गिरफ्तारी पंचनामा या अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में दर्ज करना भी अनिवार्य होगा। निर्देशों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा 47 का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है।
यदि पुलिस अधिकारी इन एमपी पुलिस गिरफ्तारी नियम का पालन नहीं करते हैं, तो उक्त गिरफ्तारी को अवैध घोषित किया जा सकता है। ऐसे मामलों में अभियुक्त को तत्काल रिहाई का कानूनी अधिकार होगा। साथ ही, संबंधित पुलिस अधिकारी के विरुद्ध न्यायालय की अवमानना का मामला भी चलाया जा सकता है। राज्य के सभी पुलिस अधीक्षकों और आयुक्तों को इन निर्देशों का सख्ती से पालन करने के आदेश दिए गए हैं।
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