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‘मुड़ मुड़ के न देख गर्ल’ : महबूब खान के नरगिस जख्म की मरहम थी 'आन' की 'राजकुमारी', ऐसे बनीं दिलीप कुमार की हीरोइन

मुंबई, 8 फरवरी (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा ने कई ऐसे कलाकार दिए हैं, जिनके अलग अंदाज और अदायगी ने दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी। ऐसी ही अभिनेत्री थीं ‘मुड़ मुड़कर न देख गर्ल’ के नाम से मशहूर नादिरा। जब भी बोल्ड किरदारों, साहसी अभिनय और अलग छवि की चर्चा होती है, तो नादिरा का नाम सबसे आगे आता है। 1950-60 के दशक में उन्होंने अपने खास अभिनय से फिल्मी दुनिया में अलग पहचान बनाई।

मुंबई, 8 फरवरी (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा ने कई ऐसे कलाकार दिए हैं, जिनके अलग अंदाज और अदायगी ने दर्शकों के दिलों में अमिट छाप छोड़ी। ऐसी ही अभिनेत्री थीं ‘मुड़ मुड़कर न देख गर्ल’ के नाम से मशहूर नादिरा। जब भी बोल्ड किरदारों, साहसी अभिनय और अलग छवि की चर्चा होती है, तो नादिरा का नाम सबसे आगे आता है। 1950-60 के दशक में उन्होंने अपने खास अभिनय से फिल्मी दुनिया में अलग पहचान बनाई।

नादिरा की पुण्यतिथि 9 फरवरी को है। नादिरा ने लगभग 60 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और सालों दर्शकों का मनोरंजन करती रहीं। नादिरा का जन्म 5 दिसंबर 1932 को इजराइल में एक यहूदी परिवार में हुआ था। उनका असली नाम फरहत एजेकेल था। बचपन से ही फरहत टॉमबॉय थीं। वह लड़कों के साथ फुटबॉल और गिल्ली-डंडा खेलती थीं। साहसी और मस्तानी स्वभाव की फरहत जब मुश्किल दौर से गुजर रहे परिवार के साथ मुंबई आईं, तो रोजी-रोटी की तलाश में काम ढूंढने लगीं।

साल 1952 में फिल्मकार महबूब खान अपनी फिल्म ‘आन’ की तैयारी कर रहे थे। यह राजपरिवार की कहानी पर आधारित फिल्म थी, जिसमें बिगड़ैल राजकुमारी का रोल नरगिस को मिलना था। लेकिन नरगिस ने राज कपूर की ‘आवारा’ साइन कर ली थी और उन्हें तारीखें नहीं दे पाईं। महबूब खान को यह तकलीफ रही, जिसे उन्होंने नादिरा के चयन के साथ छिपाया।

महबूब खान ने जब फरहत को देखा तो उनकी सुंदरता और तेवर उन्हें भा गया। उन्होंने फरहत का नाम रखा ‘नादिरा’ और उन्हें हीरो दिलीप कुमार के साथ लॉन्च किया। ‘आन’ में नादिरा ने बोल्ड और आत्मविश्वासी राजकुमारी का किरदार निभाया। उस दौर की शर्मीली नायिकाओं के उलट नादिरा का खुला और साहसी अंदाज दर्शकों को हैरान कर गया। फिल्म हिट हुई और नादिरा रातोंरात स्टार बन गईं। इसके बाद साल 1953 में ‘नगमा’ आई, जिसके गीत भी खूब चले। 1954 में ‘वारिस’ और ‘डाक बाबू’, 1955 में ‘रफ्तार’ और ‘जलन’ जैसी फिल्में मिलीं। लेकिन असली पहचान 1956 में राज कपूर की ‘श्री 420’ से मिली। इसमें नादिरा ने माया का रोल किया और गाना 'मुड़ मुड़ के न देख मुड़ मुड़ के' इतना हिट हुआ कि उन्हें हमेशा ‘मुड़ मुड़ के न देख गर्ल’ कहा जाने लगा। नादिरा पाकिजा फिल्म का भी हिस्सा रहीं।

नादिरा ने ज्यादातर फिल्मों में नेगेटिव या विलेन की भूमिकाएं निभाईं। वह नायक को अपनी अदाओं से फंसाने वाली लड़की का किरदार करती थीं। ‘छोटी छोटी बातें’, ‘काला बाजार’, ‘दिल अपना और प्रीत पराई’, ‘पाकीजा’, ‘जूली’ और ‘सागर’ भी उनकी फिल्में हैं।

नादिरा ने अशोक कुमार, शम्मी कपूर, देव आनंद जैसे सितारों के साथ काम किया। 80-90 के दशक में भी वह सक्रिय रहीं। वह ‘स्वयंवर’, ‘चालबाज’, ‘आसपास’, ‘दहशत’, ‘रास्ते प्यार के’, ‘मौला बख्श’, ‘लैला’, ‘झूठी शान’, ‘महबूबा’, ‘गॉडफादर’, ‘जोश’ जैसी फिल्मों में नजर आईं। वहीं, टीवी पर ‘एक था रस्टी’ और ‘मार्गरीटा’ सीरियल भी किए।

नादिरा की निजी जिंदगी उतार-चढ़ाव भरी रही। उनकी पहली शादी मशहूर शायर नक्श लायलपुरी से हुई, जो टूट गई। दूसरी शादी मोतीलाल राजवंश से हुई, जो सिर्फ एक सप्ताह चली।

9 फरवरी 2006 को नादिरा दुनिया को अलविदा कह गईं। लेकिन उनकी ‘मुड़ मुड़ के न देख’ वाली अदाएं, बोल्ड अंदाज और फिल्मी योगदान आज भी हिंदी सिनेमा में जिंदा हैं।

--आईएएनएस

एमटी/

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