
रीवा: भारतीय रेलवे के गौरवशाली इतिहास और इंजीनियरिंग के विकासक्रम से नई पीढ़ी को रू-ब-रू कराने के उद्देश्य से पश्चिम मध्य रेल ने एक सराहनीय कदम उठाया है। जबलपुर मंडल ने अपनी पुरानी धरोहर को सहेजते हुए एक 'नैरो-गेज डीजल लोकोमोटिव' (इंजिन) को रीवा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-1 के बाहर सर्कुलेटिंग क्षेत्र में विरासत (Heritage) के रूप में स्थापित किया है। यह पहल रेल प्रेमियों और यात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन गई है।
31 मार्च 2023 तक दी अपनी सेवाएं स्थापित किया गया यह नैरो-गेज डीजल लोकोमोटिव (लोको नंबर 513, ZDM5) चितरंजन लोकोमोटिव वर्कशॉप द्वारा वर्ष 1991 में निर्मित किया गया था। इस शक्तिशाली इंजिन ने दशकों तक अपनी सेवाएं प्रदान कीं और अंतिम बार 31 मार्च 2023 को इसे सेवामुक्त किया गया। भाप के इंजनों से लेकर आज की 160 किमी/घंटा की रफ्तार वाली आधुनिक ट्रेनों के सफर में इस इंजिन की अपनी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अब इसे स्थायी रूप से रीवा स्टेशन पर प्रदर्शित किया गया है ताकि लोग पुराने समय की कार्य प्रणालियों को समझ सकें।
विश्व धरोहर दिवस के उद्देश्यों को दे रहे विस्तार रेलवे अधिकारियों के अनुसार, प्रति वर्ष 18 अप्रैल को मनाया जाने वाला 'विश्व धरोहर दिवस' (World Heritage Day) हमें अपनी विरासतों को संभालने की जिम्मेदारी याद दिलाता है। नैरो गेज और मीटर गेज ट्रैक के ब्रॉड गेज में बदलने के साथ ही पुराने कोच और वैगन धीरे-धीरे इतिहास का हिस्सा बनते जा रहे हैं। ऐसे में इन पुराने इंजनों का संरक्षण न केवल रेलवे के इतिहास को जीवित रखता है, बल्कि हमारे अतीत और संस्कृति की झलक भी प्रस्तुत करता है।
इंजीनियरिंग के क्रमिक विकास का गवाह जबलपुर मंडल की इस पहल का उद्देश्य युवाओं को यह बताना है कि किस तरह भारतीय रेलवे ने तकनीकी सुधारों और मॉडिफिकेशन के जरिए लंबी दूरी के गंतव्य स्थलों को कम से कम समय में तय करने की क्षमता हासिल की है। रीवा स्टेशन के बाहर स्थापित यह लोकोमोटिव अब पुरानी इंजीनियरिंग और आधुनिक उन्नति के बीच एक सेतु का काम करेगा। स्टेशन पर आने वाले यात्री अब ट्रेन पकड़ने के साथ-साथ भारतीय रेल के इस ऐतिहासिक गौरव का दीदार भी कर सकेंगे।
Leave A Reviews