
वाशिंगटन. नासा ने अपने सबसे महत्वाकांक्षी अंतरिक्ष प्रोजेक्ट ‘लूनर गेटवे’ को फिलहाल रोकने का बड़ा फैसला लिया है। वाशिंगटन में आयोजित कार्यक्रम में नासा प्रमुख जेरेड इसाकमैन ने घोषणा की कि एजेंसी अब चंद्रमा की कक्षा में स्टेशन बनाने के बजाय उसकी सतह पर स्थायी बेस बनाने पर फोकस करेगी।
इस रणनीतिक बदलाव के तहत अगले सात वर्षों में करीब 20 अरब डॉलर खर्च किए जाएंगे। नासा का लक्ष्य है कि चंद्रमा की सतह पर लंबे समय तक मानव मिशन को टिकाऊ बनाया जाए। हालांकि, गेटवे प्रोजेक्ट के लिए तैयार किए गए उपकरणों का उपयोग अब मून बेस निर्माण में किया जाएगा।
नासा का यह फैसला तकनीकी के साथ-साथ रणनीतिक भी माना जा रहा है। चीन ने 2030 तक चांद पर अंतरिक्ष यात्री भेजने का लक्ष्य रखा है, जिससे अंतरिक्ष दौड़ तेज हो गई है। ऐसे में अमेरिका अपनी बढ़त बनाए रखने के लिए सीधे चंद्रमा की सतह पर मिशन को प्राथमिकता दे रहा है।
‘आर्टेमिस प्रोग्राम’ के तहत इंसानों को दोबारा चांद पर भेजने की योजना है, लेकिन गेटवे प्रोजेक्ट की लागत और देरी को देखते हुए इसमें बदलाव जरूरी माना गया। अब नासा का लक्ष्य 2028 तक चांद पर मानव मिशन उतारना है।
इस फैसले से यूरोपीय स्पेस एजेंसी जैसे अंतरराष्ट्रीय सहयोगियों में चिंता बढ़ी है, क्योंकि वे गेटवे प्रोजेक्ट में बड़े भागीदार थे।
वहीं, निजी कंपनियों की भूमिका अब और महत्वपूर्ण हो गई है। SpaceX और Blue Origin जैसी कंपनियां चंद्रमा पर उतरने के लिए लूनर लैंडर विकसित कर रही हैं।
अब सभी की नजरें ‘आर्टेमिस-2’ मिशन पर हैं, जो चांद के करीब मानव उड़ान का रास्ता खोलेगा। इसके बाद 2027 में टेस्ट मिशन और 2028 तक इंसानों को चांद की सतह पर उतारने की योजना है।
नासा का मानना है कि चांद पर स्थायी बेस भविष्य के मंगल मिशन के लिए परीक्षण केंद्र साबित होगा।
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