
अमेरिका और ईरान के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच एक बड़ी कूटनीतिक हलचल देखने को मिल रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 15 सूत्रीय युद्धविराम प्रस्ताव भेजा है। रिपोर्टों के अनुसार, यह प्रस्ताव पाकिस्तान के जरिए तेहरान तक पहुँचाया गया है। पाकिस्तान इस समय अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसने इस्लामाबाद में शांति वार्ता की मेजबानी करने की पेशकश भी की है।
अमेरिकी मीडिया के अनुसार, ट्रंप की इस 15 सूत्रीय योजना में न सिर्फ युद्ध रोकने बल्कि दीर्घकालिक शांति के लिए कड़ी शर्तें रखी गई हैं:
परमाणु कार्यक्रम पर रोक: ईरान को अपने परमाणु ठिकानों (नतांज, फोर्डो आदि) को नष्ट करना होगा और यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह बंद करना होगा।
मिसाइल नियंत्रण: ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर संख्या और मारक क्षमता की सीमा तय की जाएगी।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य: अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए हॉर्मुज की खाड़ी (Strait of Hormuz) को खुला रखने की गारंटी।
बदले में राहत: यदि ईरान इन शर्तों को मानता है, तो अमेरिका उस पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों को हटा लेगा और नागरिक परमाणु ऊर्जा (जैसे बुशहर प्लांट) में सहयोग करेगा।
दिलचस्प बात यह है कि जहाँ एक ओर ट्रंप शांति की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी सेना पश्चिम एशिया में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है।
अतिरिक्त सेना: अमेरिका अपनी 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के करीब 1,000 और सैनिकों को तैनात कर रहा है।
मरीन यूनिट्स: लगभग 5,000 अतिरिक्त मरीन और हजारों नाविकों की तैनाती की प्रक्रिया जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह 'मैक्सिमम फ्लेक्सिबिलिटी' की रणनीति है- यानी अगर ईरान प्रस्ताव नहीं मानता, तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार रहे।
इस्राइल, जो अब तक ईरान के खिलाफ निर्णायक युद्ध की उम्मीद कर रहा था, इस युद्धविराम प्रस्ताव से हैरान है। इस्राइली नेतृत्व का मानना है कि ट्रंप प्रशासन को बातचीत के बजाय ईरानी शासन पर दबाव बनाए रखना चाहिए। वहीं, ईरान के भीतर विरोधाभास दिख रहा है। ट्रंप ने दावा किया है कि जारेड कुश्नर और मार्को रुबियो जैसे अधिकारी बातचीत में शामिल हैं, लेकिन ईरानी संसद के स्पीकर ने किसी भी सीधी वार्ता से साफ इनकार किया है। ईरानी सेना का कहना है कि वे 'पूरी जीत' तक पीछे नहीं हटेंगे।
इस बीच, लेबनान से एक बड़ा अपडेट आया है। लेबनान ने ईरान के राजदूत को 'पर्सना-नॉन-ग्रेटा' (अवांछित व्यक्ति) घोषित कर देश छोड़ने का आदेश दिया है। साथ ही, लेबनान ने ईरानी उड़ानों पर भी प्रतिबंध लगा दिया है। यह कदम ईरान और लेबनान के बीच बढ़ते तनाव और क्षेत्र में ईरान के घटते प्रभाव का संकेत माना जा रहा है।
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