
नई दिल्ली। केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर राजनीति और नीति दोनों ही क्षेत्र में हलचल जारी है। कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने बजट भाषण पर तीखा हमला करते हुए कहा कि यह बजट “आर्थिक रणनीति और स्टेट्समैनशिप की कसौटी पर खरा नहीं उतरता”। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने केवल योजनाओं, मिशनों और समितियों की संख्या बढ़ाने पर जोर दिया है, जबकि उनके अनुसार इन योजनाओं में से कई अगले साल तक भुला दी जाएंगी।
चिदंबरम ने आयकर अधिनियम 2026 पर भी सवाल उठाए और कहा कि अधिकांश भारतीय आयकर के दायरे में नहीं आते, इसलिए बदलाव आम जनता के लिए सीमित प्रभाव डालेंगे। उन्होंने बजट में आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 को नजरअंदाज करने और अमेरिका-चीन से जुड़े व्यापार एवं निवेश मुद्दों का समाधान न देने का आरोप भी लगाया।
वहीं केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बजट की कुछ महत्वपूर्ण पहल का समर्थन किया। उन्होंने देश की बुनियादी ढांचा और ऊर्जा नीति पर जोर देते हुए कहा कि नए डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की शुरुआत पश्चिम बंगाल और गुजरात को जोड़ेगी, जिससे लॉजिस्टिक्स व्यवस्था और सशक्त होगी। उन्होंने कहा कि परमाणु ऊर्जा भविष्य की एआई आधारित अर्थव्यवस्था के लिए अहम है और ऊर्जा की स्थिरता सुनिश्चित करेगी।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बजट में घोषित सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का विवरण साझा किया। इनमें अहमदाबाद-मुंबई हाई-स्पीड कॉरिडोर के अलावा चेन्नई-बंगलूरू-हैदराबाद हाई-स्पीड डायमंड भी शामिल है। इसके निर्माण से दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों के बीच यात्रा समय में भारी कमी आएगी और व्यापार, उद्योग एवं रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
बजट पर विरोध और समर्थन दोनों ही स्पष्ट हैं, जहां विपक्ष इसे असंतुलित और आम आदमी के अनुकूल न मान रहा है, वहीं सरकार और मंत्री इसे आधुनिक अवसंरचना, एआई-आधारित ऊर्जा और आर्थिक विकास के लिए ऐतिहासिक कदम बता रहे हैं।
मुख्य बिंदु:-
चिदंबरम: बजट आर्थिक रणनीति और आम जनता के लिए विफल।
आयकर सुधार सीमित प्रभाव वाले; योजनाओं का भुला जाना संभव।
अश्विनी वैष्णव: नए हाई-स्पीड कॉरिडोर और एआई ऊर्जा पहल देश के लिए महत्वपूर्ण।
दक्षिण भारत में हाई-स्पीड डायमंड से यात्रा समय में भारी कमी और रोजगार अवसर बढ़ेंगे।
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