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बिजुरी में मिनी स्टेडियम निर्माण का विरोध तेज, फुटबॉल मैदान बचाने सड़कों पर उतरने कि तैयारी

बिजुरी। नगरपालिका परिषद बिजुरी द्वारा वार्ड क्रमांक 11 और 12 के बीच स्थित खुले फुटबॉल मैदान में प्रस्तावित मिनी स्टेडियम और बाउंड्रीवॉल निर्माण को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है। नागरिकों का आरोप है कि यह निर्माण कार्य जनभावनाओं और जनहित के खिलाफ है, फिर भी प्रशासन ने पूर्व में दिए गए ज्ञापन पर कोई ध्यान नहीं दिया।
स्थानीय निवासियों ने बताया कि उनके द्वारा मुख्य नगरपालिका अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर निर्माण कार्य रोकने की मांग किया गया था, लेकिन इसके विपरीत नगरपालिका ने विरोध के बावजूद काम शुरू करा दिया। जिससे नगर क्षेत्र में आक्रोश का माहौल है और लोग इसे अपनी सार्वजनिक जमीन और सुविधाओं पर अतिक्रमण जैसा मान रहे हैं।

धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों पर असर की आशंका-

नागरिकों का कहना है कि यह मैदान केवल खेल का स्थल नहीं, बल्कि नगर के सामाजिक और सांस्कृतिक जीवन का केंद्र है। मैदान के चारों ओर दुर्गा मंदिर, शंकर मंदिर, विश्वकर्मा मंदिर और रजा मस्जिद स्थित हैं। यहीं होली दहन, भंडारा, मीना बाजार और अन्य सामूहिक आयोजन होते हैं। लोगों का कहना है कि बाउंड्रीवॉल बनने से इन परंपरागत आयोजनों के लिए जगह ही नहीं बचेगी।

आवागमन व्यवस्था पर पड़ेगा असर-

स्थानीय लोगों के अनुसार नगर में भारी वाहनों का प्रवेश इसी मैदान के किनारे से होता है। यही मार्ग नगरपालिका, तहसील कार्यालय, थाना और कन्या विद्यालय तक पहुँचने का प्रमुख रास्ता भी है। यदि मैदान घेर दिया गया तो निश्चित तौर पर आम लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ेगी।

साप्ताहिक बाजार और पशुपालकों की चिंता-

यह मैदान क्षेत्र के साप्ताहिक बाजार का भी प्रमुख वैकल्पिक स्थल है। साथ ही मैदान में पशु चिकित्सालय और शासकीय दुग्ध संग्रह केंद्र संचालित हैं। पशुपालकों और छोटे व्यापारियों का कहना है कि बाउंड्रीवॉल बनने से उनके आने-जाने के रास्ते एक तरह से बंद हो जाएंगे, जिससे रोज़गार पर भी सीधा असर पड़ेगा।

सरकारी धन के उपयोग पर भी सवाल-

विरोध कर रहे नागरिकों ने आर्थिक पहलू पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वार्ड क्रमांक 13 में पहले से लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से एक बड़ा स्टेडियम प्रस्तावित है। ऐसे में कुछ ही दूरी पर 3 करोड़ रुपये खर्च कर दूसरा मिनी स्टेडियम बनाना केवल सरकारी धन की बर्बादी है।

जनता की मांग स्टेडियम नहीं, अस्पताल और स्कूल को मिले प्राथमिकता-

प्रदर्शनकारी नागरिकों ने सुझाव दिया है कि मिनी स्टेडियम के लिए स्वीकृत 3 करोड़ रुपये की राशि को नगर के सरकारी अस्पताल, स्कूलों और मूलभूत सुविधाओं के विकास में लगाया जाए, जिससे आम जनता को सीधा लाभ मिल सके।

प्रशासन की चुप्पी से बढ़ रहा असंतोष-

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने जनभावनाओं का सम्मान नहीं किया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। जिसकी जिम्मेदारी स्वयं नगरपालिका परिषद बिजुरी की ही होगी।

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