
पांढुर्णा जिले में सदियों पुरानी और जानलेवा परंपरा 'गोटमार मेले के दौरान शुक्रवार को जाम नदी का किनारा फिर रक्तरंजित हो उठा। नदी के बीच स्थापित पलाश के पेड़ पर लगे झंडे को हासिल करने के लिए पांढुर्णा और सावरगांव पक्ष के हजारों खिलाड़ी आमने-सामने डट गए। सुबह 11 बजे से शुरू हुआ पत्थरों की बौछार का सिलसिला शाम तक अनवरत जारी रहा। शाम 5 बजे तक इस भीषण पथराव में घायलों की संख्या रिकॉर्ड 1,029 तक पहुंच गई। इनमें से 9 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जबकि हड्डियों के टूटने और सिर की गंभीर चोटों के चलते 5 लोगों को आपातकालीन स्थिति में नागपुर रेफर किया गया है।
इस खूनी संघर्ष के बीच सबसे चौंकाने वाला दृश्य तब सामने आया जब पांढुर्णा से कांग्रेस विधायक निलेश उईके स्वयं मैदान में खिलाड़ियों के बीच उतर आए। विधायक ने न सिर्फ खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाया, बल्कि खुद हाथ में पत्थर उठाकर सावरगांव पक्ष की ओर फेंका। इसका वीडियो भी सामने आया है। अपने इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक निलेश उईके ने कहा कि वे पिछले 10 वर्षों से गोटमार खेल रहे हैं और यह क्षेत्र की सदियों पुरानी आस्था और लोकभावनाओं से जुड़ा हुआ पर्व है। हालांकि उन्होंने अपील की कि लोग परंपरा का सम्मान करते हुए संयम बरतें ताकि किसी को जानलेवा चोट न पहुंचे।
पत्थरों की बारिश का शिकार न केवल खिलाड़ी बल्कि तमाशबीन भी बने। महाराष्ट्र के मोवाड से अपने पिता दीपक के साथ मेला देखने आए 5 वर्षीय बालक योगेश मरावी के सिर पर अचानक पत्थर लग गया, जिससे वह लहूलुहान हो गया। पिता अपने मासूम बच्चे को गोद में लेकर रोते हुए अस्पताल की ओर दौड़ते नजर आए। इसके अलावा सावरगांव निवासी 33 वर्षीय नितिन भादे का पैर टूट गया, 48 वर्षीय प्रह्लाद साहू के कंधे की हड्डी टूट गई, पांढुर्णा निवासी 39 वर्षीय सचिन हाटेकर का पैर टूट गया और सावरगांव के 30 वर्षीय संजय धारपुरे के सिर व पैर में गंभीर फ्रैक्चर हुआ है। गंभीर हालत को देखते हुए सचिन, संजय समेत 5 घायलों को नागपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
प्रशासन द्वारा मेले में गोफन (गुलेल जैसी रस्सी) के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने के बावजूद युवक खुलेआम गमछे से गोफन बनाकर कई सौ मीटर दूर तक घातक पत्थर बरसाते नजर आए। पथराव की तीव्रता इतनी तेज थी कि आसपास के मकानों की टीन शेड टूट गईं और कई खिलाड़ी जान बचाने के लिए नदी के बहते पानी में कूद गए। दोपहर बाद पांढुर्णा पक्ष के एक खिलाड़ी ने जान जोखिम में डालकर नदी के बीच लगे पलाश के पेड़ पर कुल्हाड़ी से वार कर झंडा काटने की कोशिश की, जिससे दोनों ओर से पथराव और उग्र हो गया।
मेला स्थल पर स्वास्थ्य विभाग ने युद्धस्तर पर व्यवस्थाएं संभालीं। मैदान के आसपास 7 अस्थायी स्वास्थ्य शिविर बनाए गए, जहां 44 डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की टीम लगातार टांके लगाने और प्राथमिक उपचार में जुटी रही। गंभीर घायलों को सिविल अस्पताल पहुंचाने के लिए 22 एंबुलेंस लगातार सायरन बजाते हुए दौड़ती रहीं। पूरे मेला परिक्षेत्र में कानून-व्यवस्था के लिए 700 से अधिक पुलिस जवान तैनात रहे, जबकि 3 ड्रोन और 10 सीसीटीवी कैमरों से चप्पे-चप्पे पर नजर रखी गई। गौरतलब है कि वर्ष 1955 से 2025 तक इस खूनी खेल में अब तक 13 लोगों की जान जा चुकी है।
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