
पन्ना वनमंडल अंतर्गत बृजपुर इलाके में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की शेड्यूल-1 सूची में शामिल एक दुर्लभ लकड़बग्घे (Hyena) की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मंगलवार, 6 अक्टूबर को वन विभाग की टीम ने सर्चिंग के दौरान उसका शव बरामद किया। दो दिनों से असामान्य व्यवहार कर रहे इस वन्यजीव के अचानक दम तोड़ देने के बाद वन महकमे में हड़कंप मच गया है। प्राथमिक लक्षणों के आधार पर लकड़बग्घे के रेबीज से ग्रसित होने की आशंका जताई जा रही है।
पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 5 अक्टूबर की शाम करीब 7:00 बजे हुई, जब पथरिया बीट से सटी राजस्व भूमि पर ग्रामीणों ने लकड़बग्घे को असामान्य हरकते करते देखा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह जमीन पर पड़े पत्थर चबा रहा था और लगातार आक्रामक होकर अजीब आवाज में दहाड़ रहा था। ग्रामीणों द्वारा सूचना दिए जाने पर बीट गार्ड कमलेश विश्वकर्मा और रूपेश कुमार तुरंत मौके पर पहुंचे और वन्यजीव की सुरक्षा व ग्रामीणों को दूर रखने के लिए देर रात तक निगरानी करते रहे।
मंगलवार सुबह जब वन विभाग के गश्ती दल ने पुनः क्षेत्र में खोजबीन शुरू की, तो लकड़बग्घा जमीन पर अचेत अवस्था में पड़ा मिला। पास जाकर परीक्षण करने पर उसकी मौत की पुष्टि हुई। दुर्लभ वन्यजीव की मौत की खबर मिलते ही वनमंडल अधिकारी (डीएफओ) के निर्देश पर रेंजर राहुल सिकरवार, डिप्टी रेंजर जगदीश प्रसाद अहिरवार, वनकर्मी विवेक द्विवेदी, मुकेश बिसारिया और सर्वजीत सिंह विशेष डॉग स्क्वॉड दल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।
फोरेंसिक और डॉग स्क्वॉड टीम की मदद से आसपास के पूरे इलाके में सघन सर्चिंग की गई, ताकि किसी भी प्रकार के शिकार, जहरीले पदार्थ के उपयोग या अन्य मानवीय हस्तक्षेप के साक्ष्य तलाशे जा सकें। टीम ने आवश्यक साक्ष्य संकलित कर मौका पंचनामा तैयार किया और शव को सुरक्षित निगरानी में भिजवाया।
वन अधिकारियों ने बताया कि मृत लकड़बग्घे का विधिवत पोस्टमार्टम बुधवार को वन्यजीव चिकित्सकों के विशेषज्ञ पैनल द्वारा राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और वन विभाग के तय प्रोटोकॉल के तहत किया जाएगा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विसरा जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि लकड़बग्घे की मौत रेबीज संक्रमण से हुई अथवा किसी अन्य प्राकृतिक या विषाक्त कारण से।
Leave A Reviews