
पन्ना जिले में केन-बेतवा लिंक परियोजना सहित मझगांय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी परियोजनाओं से प्रभावित आदिवासी और किसान अपनी मांगों को लेकर अड़े हुए हैं। इस पन्ना जल सत्याग्रह के छठे दिन भी प्रदर्शनकारी उफनती नदी के बीच पानी में खड़े होकर उचित मुआवजे और सम्मानजनक पुनर्वास की गुहार लगा रहे हैं। 'चिता आंदोलन' के नाम से चल रहे इस प्रदर्शन में शामिल लोगों का साफ कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, वे पीछे नहीं हटेंगे।
जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में यह आंदोलन चलाया जा रहा है। नदी के बीच खड़े प्रदर्शनकारी 'अभी तो ये अंगड़ाई है, आगे और लड़ाई है' और 'भारत माता की जय' जैसे नारे लगा रहे हैं। इस पन्ना जल सत्याग्रह में पुरुषों के साथ-साथ महिलाएं भी लकड़ी पर लेटकर और गले तक पानी में डूबकर विरोध दर्ज करा रही हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि सरकार या तो उन्हें हक दे, या फिर इसी जल में उनकी जान जाने दे।
आंदोलन स्थल पर बुनियादी सुविधाओं को लेकर प्रशासन पर गंभीर आरोप लगे हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि प्रशासन ने वहां पीने के साफ पानी की व्यवस्था बंद करवा दी है, जिसके कारण बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे नदी का मटमैला पानी पीने को मजबूर हैं। इस दूषित पानी की वजह से कई लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। हालांकि, मौके पर पहुंचे अधिकारियों और ग्रामीणों के बीच तीखी बहस भी हुई, जहां ग्रामीणों ने प्रशासन पर डराने-धमकाने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर, पन्ना विधायक बृजेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि राज्य सरकार ने मझगांय, रूंझ और केन-बेतवा लिंक परियोजना के प्रभावितों के लिए विशेष पुनर्वास पैकेज को मंजूरी दी है।
कुल लाभार्थी: 2500 से अधिक विस्थापित परिवार।
एकमुश्त राशि: पात्र परिवारों को प्रति परिवार ₹12.50 लाख तक का नगद अनुदान।
भूखंड विकल्प: शहरी क्षेत्र में भूखंड लेने पर ₹6.50 लाख और ग्रामीण क्षेत्र में ₹7 लाख की सहायता।
अतिरिक्त लाभ: रजिस्ट्री पर लगने वाला स्टाम्प और पंजीयन शुल्क सरकार देगी।
विस्थापितों का कहना है कि केवल कागजी पैकेज की घोषणा से पन्ना जल सत्याग्रह खत्म नहीं होगा। जब तक हर एक वास्तविक विस्थापित को जमीन पर अधिकार और उचित पुनर्वास नहीं मिल जाता, तब तक यह लड़ाई जारी रहेगी।
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