
भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को मध्यप्रदेश विधानसभा स्थित सेंट्रल हॉल में मीडिया से चर्चा करते हुए शिक्षा व्यवस्था और युवाओं के हित में कई बड़े ऐलानों की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि प्रदेश सरकार शिक्षकों और विद्यार्थियों के कल्याण से जुड़े सभी विषयों पर अत्यंत गंभीर और संवेदनशील है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के युवाओं और विद्यार्थियों के हित में जो निर्णय लिए जाते हैं, मध्य प्रदेश उन्हें लागू करने वाला देश का पहला राज्य बनता है। समय की मांग को देखते हुए युवाओं से जुड़े न्यायिक मामलों का त्वरित निपटारा आवश्यक है।
4 शहरों में फास्ट ट्रैक कोर्ट:
प्रदेश के चार प्रमुख महानगरों—भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाएगा। इन अदालतों में पेपर लीक, परीक्षाओं में गड़बड़ी और विद्यार्थियों से जुड़े अन्य न्यायिक मामलों का निराकरण मात्र 3 महीने की समय सीमा में किया जाएगा।
NEET परीक्षा और पारदर्शी व्यवस्था (SOP):
मुख्यमंत्री ने बताया कि नीट पेपर लीक का मामला सामने आते ही प्रधानमंत्री मोदी के निर्देश पर SIT गठित कर आरोपियों की त्वरित गिरफ्तारियां की गईं और दोबारा निष्पक्ष परीक्षा कराई गई। भविष्य में नीट जैसी परीक्षाएं पूरी तरह पारदर्शी और बेहतर तरीके से आयोजित हों, इसके लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार किया जा रहा है।
शिक्षा के क्षेत्र में MP का रिपोर्ट कार्ड:
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020: मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य है जिसने NEP-2020 को सबसे पहले लागू किया।
नए विश्वविद्यालय: पिछले ढाई वर्षों के कार्यकाल में राज्य सरकार ने 3 नए शासकीय विश्वविद्यालय प्रारंभ किए हैं।
देश में शिक्षा और मेडिकल सेक्टर का विस्तार:
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल की उपलब्धियां गिनाते हुए बताया कि देश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या दोगुनी से अधिक हो गई है। देश भर में विश्वविद्यालयों की संख्या 641 से बढ़कर 1400 से अधिक हो चुकी है, वहीं मेडिकल सीटों की संख्या 50 हजार से बढ़ाकर 1 लाख से अधिक कर दी गई है।
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