मैहर जिले की रामनगर तहसील में रामनगर श्रृंखला न्यायालय मांग को लेकर आम जनता में भारी आक्रोश व्याप्त है। दो दशक से अधिक समय (26 साल) बीत जाने के बाद भी यहां व्यवहार न्यायाधीश (एडीजे कोर्ट) का शुभारंभ नहीं हो सका है।
आदेश और जमीन आरक्षित होने के बावजूद कोर्ट चालू न होने पर स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
रामनगर तहसील क्षेत्र से हर साल बड़ी संख्या में दीवानी और फौजदारी के मुकदमे अदालतों तक पहुँचते हैं। कोर्ट न होने के कारण बाणसागर डूब क्षेत्र के हरियरी, बांसी, कैथहा, कंदवारी, हिनौती और देवदहा जैसे सैकड़ों गांवों के लोगों को न्याय पाने के लिए अमरपाटन जाना पड़ता है।
समय और धन की हानि: ग्रामीणों को न्याय पाने के लिए सैकड़ों किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है।
पुलिस को भी परेशानी: पुलिस विभाग को भी अपराधियों का चालान पेश करने अमरपाटन जाना पड़ता है, जिससे व्यवस्था प्रभावित होती है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि कोर्ट के लिए जो सरकारी पुरानी तहसील की जमीन आरक्षित की गई थी, वहां नगर परिषद कार्यालय बना दिया गया।
नागरिकों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों और कुछ स्वार्थी नेताओं ने जनहित की इस मुख्य मांग को दबा दिया। विधिक जागरूकता शिविरों में भी न्यायाधीशों ने रामनगर में कोर्ट की आवश्यकता को जरूरी बताया था, लेकिन प्रशासनिक उपेक्षा के चलते मामला अटका हुआ है।
रामनगर श्रृंखला न्यायालय मांग को लेकर अब ग्रामीण और नगरीय क्षेत्र की जनता पूरी तरह एकजुट हो चुकी है। क्षेत्रवासियों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि रामनगर में जल्द से जल्द व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 की नियुक्ति की जाए।
स्थानीय लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द ही इस दिशा में कोई ठोस और सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तो वे सड़कों पर उतरकर बड़ा आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करेंगे।
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