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पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने प्रशिक्षु आरक्षित डॉक्टरों की अधिकतम संख्या बढ़ाई


कोलकाता, 7 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को एक अधिसूचना जारी कर प्रशिक्षु आरक्षित श्रेणी में रखे जा सकने वाले डॉक्टरों की अधिकतम अनुमत संख्या बढ़ा दी है।

कोलकाता, 7 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य विभाग ने शुक्रवार को एक अधिसूचना जारी कर प्रशिक्षु आरक्षित श्रेणी में रखे जा सकने वाले डॉक्टरों की अधिकतम अनुमत संख्या बढ़ा दी है।

पहले यह संख्या 477 थी, लेकिन राज्य सरकार की अधिसूचना के अनुसार अब से प्रशिक्षु आरक्षित श्रेणी में रखे जा सकने वाले सेवारत डॉक्टरों की संख्या बढ़ाकर 662 कर दी जाएगी।

प्रशिक्षु आरक्षित श्रेणी के डॉक्टर सेवारत सरकारी चिकित्सा अधिकारी होते हैं, जिन्हें सरकारी प्रायोजित स्नातकोत्तर (पीजी) डिग्री या डिप्लोमा पाठ्यक्रम करने के लिए अस्थायी रूप से उनके नियमित कर्तव्यों से मुक्त किया जाता है, लेकिन वे सेवा में बने रहते हैं। यह सुविधा मुख्य रूप से ग्रामीण या दूरस्थ चिकित्सा चौकियों में तैनात चिकित्सा अधिकारियों को दी जाती है।

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल में राज्य द्वारा संचालित चिकित्सा प्रणाली में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने के लिए यह निर्णय लिया गया है।

पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य सेवा, पश्चिम बंगाल लोक स्वास्थ्य प्रशासनिक सेवा और पश्चिम बंगाल स्वास्थ्य शिक्षा सेवा के चिकित्सा अधिकारियों को इस 'प्रशिक्षु आरक्षित' श्रेणी में शामिल किया गया है।

पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम ने इस निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इस कदम से अधिक डॉक्टरों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।

एक फोरम प्रतिनिधि ने कहा कि पहले, यदि ‘प्रशिक्षु आरक्षित’ श्रेणी की सीमा पूरी हो जाती थी, तो कई डॉक्टर योग्य होने के बावजूद एमडी या एमएस जैसे उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों में प्रवेश पाने के अवसर से वंचित रह जाते थे। अब, अधिक संख्या में डॉक्टर उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए अवकाश ले सकेंगे। इसके परिणामस्वरूप, पश्चिम बंगाल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या में वृद्धि होगी। भविष्य में सेवाओं की गुणवत्ता में और सुधार होगा। ‘प्रशिक्षु आरक्षित’ श्रेणी में संख्या बढ़ने से स्नातकोत्तर सीटों के व्यर्थ होने की संभावना भी समाप्त हो जाएगी।

राज्य में विभिन्न चिकित्सा चिकित्सकों के मंचों द्वारा लंबे समय से ‘प्रशिक्षु आरक्षित’ श्रेणी के डॉक्टरों के लिए सीमा बढ़ाने की मांग उठाई जा रही थी। उनका तर्क था कि इस वृद्धि से चिकित्सा विज्ञान में स्नातकोत्तर सीटों की बर्बादी को रोकने या कम से कम कम करने में मदद मिलेगी।

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद, नई राज्य सरकार ने इस संबंध में सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

--आईएएनएस

एमएस/

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