
पाटन देशबन्धु। पाटन पुलिस ने शायद कभी सोचा भी नहीं होगा कि नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही चोरी की वारदातें इतना उग्र रूप ले लेंगी कि नगर के कुछ युवा पाटन नगर की सड़कों पर उतरकर जन आंदोलन करने को मजबूर हो जाएंगे। बुधवार को नगर के युवाओं और नागरिकों ने पाटन सिविल कोर्ट चौराहे पर जाम लगाकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया।
इसके बाद आंदोलनकारी तपती धूप में पैदल मार्च निकालते हुए पाटन थाने पहुंचे और थाने का घेराव कर पुलिस व्यवस्था के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
जानकारी के अनुसार बीते कई दिनों से पाटन नगर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। नागरिकों का आरोप है कि पाटन पुलिस की कार्यशैली बेहद सुस्त और लापरवाह हो चुकी है, जिसके चलते चोरों के हौसले बुलंद हैं और अपराधियों में पुलिस का कोई भय नहीं रह गया है।

प्रदर्शन के दौरान सिविल कोर्ट चौराहे पर लंबा जाम लग गया,जिससे घंटों यातायात बाधित रहा। राहगीरों और वाहन चालकों को तेज धूप में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। आंदोलनकारी नागरिकों ने आरोप लगाया कि पाटन थाना क्षेत्र में रेत,मुरुम, अवैध शराब,जुआ-सट्टा, गांजा,अवैध लकड़ी और गोवंश तस्करी जैसे मामलों में पुलिस की भूमिका संदेह के घेरे में है। लोगों का कहना है कि थाना अमला अवैध उगाही में चौबीसो घण्टे व्यस्त रहता है,जिसके कारण चोरी की घटनाओं पर नियंत्रण नहीं हो पा रहा।
नगर के कुछ लोगों ने यहां तक आरोप लगाए कि चोरी की घटनाओं में भी पुलिस की मिलीभगत हो सकती है,क्योंकि अब तक एक भी बड़ी चोरी का खुलासा पाटन पुलिस नहीं कर पाई है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है,लेकिन जनता में पुलिस के प्रति भारी आक्रोश देखने को मिला है।
इस पूरे आंदोलन ने स्थानीय राजनीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पाटन विधानसभा में कई लोग नेता बनने के सपने देख रहे हैं,लेकिन जनता की समस्याओं की चिंता किसी को नहीं है। आम जनता सड़कों पर संघर्ष कर रही है,जबकि बड़े नेता एसी कमरों में बैठकर आंदोलन की पल पल की जानकारी लेते दिख रहे है।
आंदोलन के दौरान पाटन थाने पहुंचे एसडीएम मानवेन्द्र सिंह राजपूत को आंदोलनकारियों ने ज्ञापन सौंपते हुए नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही चोरी की घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करने और जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है।
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