
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते युद्ध के खतरों और अस्थिरता के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर शांति दूत की भूमिका निभाते हुए कई देशों के शीर्ष नेताओं से टेलीफोन पर विस्तार से चर्चा की है। पीएम मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, मलयेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक के साथ मौजूदा हालातों पर गहरी चिंता व्यक्त की। इस दौरान भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि संवाद और कूटनीति ही तनाव कम करने (De-escalation) का एकमात्र रास्ता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से बातचीत के दौरान क्षेत्र में तत्काल शांति बहाली की आवश्यकता पर बल दिया। दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति जताई कि पश्चिम एशिया में स्थिरता न केवल क्षेत्र के लिए बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है। उन्होंने भविष्य में भी इस संकट को सुलझाने के लिए करीबी समन्वय (Coordination) जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।
मलयेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम और ओमान के सुल्तान हैथम बिन तारिक से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने उन्हें 'ईद-उल-फितर' की अग्रिम शुभकामनाएं भी दीं। ओमान के सुल्तान से चर्चा करते हुए पीएम मोदी ने ओमान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के उल्लंघन की कड़ी निंदा की। साथ ही, उन्होंने संकट के समय भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी में ओमान की सहायक भूमिका की सराहना की। दोनों नेताओं ने होरमुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सुरक्षित और निर्बाध समुद्री आवागमन सुनिश्चित करने के महत्व को भी रेखांकित किया।
इससे पूर्व, प्रधानमंत्री ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद से भी संवाद किया था। पीएम मोदी ने कुवैत में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा और भलाई के लिए वहां की सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हॉर्मुज स्ट्रेट से व्यापारिक जहाजों का सुरक्षित निकलना भारत की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। प्रधानमंत्री ने दोहराया कि भारत किसी भी देश की क्षेत्रीय अखंडता पर हमले के खिलाफ है और शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर है।
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