
नई दिल्ली. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) ने राज्यसभा के 229 सांसदों के शपथपत्रों का विश्लेषण कर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च सदन के लगभग 32 प्रतिशत सांसदों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि 14 प्रतिशत सांसद 'अरबपति' की श्रेणी में आते हैं। यह विश्लेषण हाल ही में निर्वाचित 37 सदस्यों सहित सदन के वर्तमान स्वरूप की एक स्पष्ट तस्वीर पेश करता है।
ADR की रिपोर्ट के अनुसार, 229 में से 73 सांसदों (32%) ने खुद स्वीकार किया है कि उनके खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें से 36 सांसद (16%) ऐसे हैं जिन पर हत्या, हत्या के प्रयास और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे गंभीर आरोप हैं। दलगत आधार पर देखें तो भाजपा के 99 में से 27, कांग्रेस के 28 में से 12, और टीएमसी व आम आदमी पार्टी के 4-4 सांसदों ने अपने शपथपत्रों में आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारी दी है।
सदन की आर्थिक स्थिति पर नजर डालें तो राज्यसभा सांसदों की औसत संपत्ति 120.69 करोड़ रुपये आंकी गई है। कुल 31 सांसद ऐसे हैं जिनकी संपत्ति अरबों में है। दिलचस्प बात यह है कि आम आदमी पार्टी (AAP) के सांसदों की औसत संपत्ति सबसे अधिक 574.09 करोड़ रुपये है, जबकि भाजपा की औसत संपत्ति 28.29 करोड़ रुपये और कांग्रेस की 128.61 करोड़ रुपये दर्ज की गई है। वाईएसआरसीपी और सपा के सांसदों की औसत संपत्ति भी क्रमशः 522 करोड़ और 399 करोड़ रुपये के करीब है।
संपत्ति के मामले में बीआरएस के बंदी पार्था सारथी 5,300 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के साथ देश के सबसे अमीर राज्यसभा सांसद हैं। उनके बाद 'आप' के राजिंदर गुप्ता (5,053 करोड़) का नंबर आता है। वहीं, सदन के भीतर अमीरी-गरीबी का बड़ा अंतर भी देखने को मिला है। आम आदमी पार्टी के ही संत बलबीर सिंह सदन के सबसे गरीब सांसद हैं, जिनकी कुल संपत्ति मात्र 3 लाख रुपये है। उनके बाद मणिपुर के महाराजा सनाजाओबा लिसेम्बा (5 लाख) और टीएमसी के प्रकाश चिक बड़ाइक (9 लाख) का स्थान है।
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