
तेहरान/वाशिंगटन. मिडिल-ईस्ट में जारी भीषण संघर्ष के बीच शांति की एक धुंधली उम्मीद जागी है. अमेरिका और ईरान 21 अप्रैल को समाप्त हो रहे 14 दिवसीय सीजफायर की समय सीमा से पहले एक स्थायी समझौते के करीब पहुंच रहे हैं. सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान की मध्यस्थता में चल रही यह बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर है.
पाकिस्तानी सेना प्रमुख की 'मैसेंजर' भूमिका
पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे हैं. उन्होंने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की है. माना जा रहा है कि मुनीर अपने साथ अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ट्रंप प्रशासन का एक 'ड्राफ्ट प्रस्ताव' लेकर आए हैं. पाकिस्तान के साथ-साथ मिस्र और तुर्की भी इस पर्दे के पीछे की कूटनीति (Back-channel diplomacy) में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
ट्रंप की 'नौसैनिक घेराबंदी' का असर
अमेरिकी अधिकारियों का दावा है कि ईरान पर समझौते का दबाव राष्ट्रपति ट्रंप की होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) में की गई सख्त नौसैनिक नाकेबंदी के कारण बढ़ा है.
आर्थिक चोट: पिछले 48 घंटों में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने 9 जहाजों को ईरानी बंदरगाहों पर जाने से रोका है.
तेल निर्यात ठप: ईरान के खार्ग द्वीप से होने वाला 90% तेल निर्यात संकट में है. यदि ईरान अपना 15 लाख बैरल रोजाना का निर्यात नहीं कर पाता है, तो उसे हर दिन करीब 140 मिलियन डॉलर का घाटा होगा.
क्या हैं डील की शर्तें?
प्रस्तावित ड्राफ्ट के अनुसार, शांति समझौते के दो चरण हो सकते हैं:
पहला चरण: सीजफायर को 45 दिनों के लिए बढ़ाना.
दूसरा चरण: होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त प्रतिबंधों के बदले कुछ आर्थिक राहत देना.
Leave A Reviews