
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे म्युंग रविवार से तीन दिवसीय आधिकारिक भारत यात्रा पर आ रहे हैं। इस यात्रा को भारत और दक्षिण कोरिया के बीच व्यापार, रक्षा और उन्नत प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियाँ तेजी से बदल रही हैं और एशिया में रणनीतिक साझेदारियों का महत्व बढ़ता जा रहा है।
राष्ट्रपति ली अपनी यात्रा के दौरान सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ व्यापक स्तर की वार्ता करेंगे। इस बैठक में दोनों देशों के बीच कई प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनने की संभावना है। इनमें जहाज निर्माण, समुद्री उद्योग, वित्तीय सहयोग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और रक्षा जैसे रणनीतिक क्षेत्र शामिल हैं। दक्षिण कोरिया के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार वाई सुंग-लाक ने सियोल में कहा है कि यह यात्रा दोनों देशों के बीच आर्थिक और रणनीतिक सहयोग के एक नए अध्याय की शुरुआत कर सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष और उससे उत्पन्न वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत और दक्षिण कोरिया ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं (energy supply chains) पर घनिष्ठ समन्वय बनाए रखने पर विशेष ध्यान देंगे। इससे दोनों देशों को वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों का सामना करने में मदद मिलेगी और आपूर्ति व्यवस्था अधिक स्थिर हो सकेगी।
इसके अलावा, राष्ट्रपति ली जे म्युंग नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय व्यापार मंच में भी भाग ले सकते हैं। इस मंच में दोनों देशों के प्रमुख कॉर्पोरेट अधिकारी, निवेशक और नीति निर्माता शामिल होंगे, जहां निवेश बढ़ाने और नई तकनीकी साझेदारियों को आगे बढ़ाने पर चर्चा होगी। यह मंच भारत और दक्षिण कोरिया के बीच व्यापारिक संबंधों को और गहरा करने का अवसर प्रदान करेगा।
भारत और दक्षिण कोरिया के आर्थिक संबंध पिछले कई वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। 2010 में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के लागू होने के बाद से दोनों देशों के बीच व्यापार में तेजी देखी गई है। जनवरी से अक्टूबर 2025 तक दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 21.5 अरब रुपये तक पहुंचा, जबकि वर्ष 2024 में यह आंकड़ा 25.1 अरब रुपये था। भारत से दक्षिण कोरिया को निर्यात की जाने वाली प्रमुख वस्तुओं में एल्यूमीनियम, अनाज तथा लोहा और इस्पात शामिल हैं, जो दोनों देशों की व्यापारिक निर्भरता और सहयोग को दर्शाते हैं।
निवेश के क्षेत्र में भी दक्षिण कोरिया भारत के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार बना हुआ है। वर्ष 2024 में दक्षिण कोरिया ने भारत में लगभग 929 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश किया, जिससे यह भारत का 15वां सबसे बड़ा विदेशी निवेशक बन गया है। यह निवेश भारत के औद्योगिक विकास, तकनीकी उन्नति और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
कुल मिलाकर, राष्ट्रपति ली जे म्युंग की यह यात्रा भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को एक नई दिशा देने वाली मानी जा रही है। दोनों देशों के बीच बढ़ता सहयोग न केवल आर्थिक संबंधों को मजबूत करेगा, बल्कि रक्षा, तकनीक और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भी एक स्थिर और भरोसेमंद साझेदारी स्थापित करने में मदद करेगा।
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