
दोहा. मिडिल ईस्ट का संघर्ष अब एक भीषण वैश्विक ऊर्जा संकट (Global Energy Crisis) में तब्दील हो गया है. ईरान द्वारा कतर के रास लफान (Ras Laffan) स्थित दुनिया के सबसे बड़े LNG कॉम्प्लेक्स पर किए गए मिसाइल हमलों ने दुनिया की गैस सप्लाई चेन को तोड़ दिया है. विशेषज्ञों का दावा है कि इस हमले का असर अगले 5 सालों तक बना रह सकता है.
संकट की गंभीरता: मुख्य बिंदु
17% निर्यात ठप: हमले में कतर की कुल LNG निर्यात क्षमता का लगभग 17 प्रतिशत हिस्सा बर्बाद हो गया है. विशेष रूप से ट्रेन 4 और ट्रेन 6 नामक दो प्रमुख प्रोडक्शन यूनिट्स को भारी नुकसान पहुँचा है.
भारत पर सबसे बड़ा प्रहार: भारत अपनी जरूरत की 47% LNG कतर से मंगवाता है. आपूर्ति में इस बड़ी कटौती से भारत में सीएनजी (CNG), पीएनजी (PNG) और बिजली उत्पादन की लागत बढ़ना लगभग तय है.
अरबों का नुकसान: कतर एनर्जी के मुताबिक, इस तबाही से देश को सालाना 20 अरब डॉलर के राजस्व का घाटा होगा. मरम्मत में 3 से 5 साल लगने की संभावना है.
'फोर्स मेज्योर' (Force Majeure) लागू: कतर ने कई देशों के साथ किए गए दीर्घकालिक समझौतों को फिलहाल पूरा करने में असमर्थता जताते हुए 'फोर्स मेज्योर' घोषित कर दिया है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव
कतर पर निर्भर रहने वाले देश—चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम—अब वैकल्पिक स्रोतों की तलाश में जुट गए हैं. गैस की कमी से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में उछाल आने की आशंका है, जिससे महंगाई और बढ़ सकती है.
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