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पश्चिम एशिया में कोहराम: ईरान ने अमेरिकी F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट को बनाया निशाना, क्षतिग्रस्त विमान की इमरजेंसी लैंडिंग

वाशिंगटन. मध्य पूर्व में जारी युद्ध के बीच ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक सनसनीखेज दावा किया है। ईरान के अनुसार, उनकी वायु रक्षा प्रणाली ने गुरुवार को अमेरिका के अत्याधुनिक F-35 लड़ाकू विमान को सफलतापूर्वक निशाना बनाया, जिससे उसे गंभीर क्षति पहुँची और पश्चिम एशिया में एक अमेरिकी एयरबेस पर आपातकालीन स्थिति में उतरना पड़ा। अमेरिकी सेना की मध्य कमान (CENTCOM) ने भी विमान को नुकसान पहुँचने और उसकी इमरजेंसी लैंडिंग की पुष्टि की है। यह फरवरी के अंत में संघर्ष शुरू होने के बाद पहला मौका है जब ईरान ने सीधे तौर पर किसी अमेरिकी पांचवीं पीढ़ी के विमान को निशाना बनाया है।

CENTCOM का बयान: पायलट सुरक्षित, जांच जारी

अमेरिकी सेना की मध्य कमान के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिंस ने जानकारी दी कि यह F-35 विमान ईरान के ऊपर एक मिशन पर था, जब इसे तकनीकी बाधा या हमले के कारण आपात स्थिति का सामना करना पड़ा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विमान सुरक्षित रूप से एयरबेस पर उतर गया है और पायलट की स्थिति स्थिर है। हालांकि, कैप्टन हॉकिंस ने घटना के पीछे के सटीक कारणों पर विस्तार से कुछ नहीं कहा, लेकिन उन्होंने पुष्टि की कि "इस गंभीर घटना की उच्च स्तरीय जांच की जा रही है।" 100 मिलियन डॉलर से अधिक की कीमत वाला यह स्टेल्थ विमान अपनी अदृश्य क्षमताओं के लिए जाना जाता है, जिसे भेदना बेहद कठिन माना जाता है।

IRGC का दावा: '125 ड्रोन इंटरसेप्ट करने के बाद किया हमला'

ईरान की आईआरजीसी (IRGC) ने इस सैन्य अभियान का एक वीडियो और आधिकारिक बयान जारी कर अपनी वायु रक्षा शक्ति का प्रदर्शन किया है। आईआरजीसी के मुताबिक, गुरुवार दोपहर करीब ढाई बजे मध्य ईरान के ऊपर उनकी उन्नत रक्षा प्रणाली ने अमेरिकी विमान को इंटरसेप्ट किया। बयान में कहा गया है कि यह कार्रवाई 125 से अधिक अमेरिकी-इजरायली ड्रोनों को सफलतापूर्वक मार गिराने के बाद की गई। ईरान ने इसे अपने वायु रक्षा तंत्र में किए गए 'विशेष तकनीकी सुधारों' की बड़ी जीत बताया है।

रणनीतिक महत्व और बढ़ता खतरा

F-35 जैसे 'स्टेल्थ' विमान का निशाना बनना वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों के लिए चौंकाने वाली खबर है, क्योंकि अमेरिका और इजरायल दोनों ही इस संघर्ष में इस विमान का प्रमुखता से उपयोग कर रहे हैं। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका ईरान के खिलाफ अपने अभियानों में सफलता का दावा कर रहा था। यदि ईरान का दावा पूरी तरह सही साबित होता है, तो यह युद्ध की दिशा बदल सकता है और क्षेत्र में अमेरिकी वायु प्रभुत्व (Air Superiority) के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर सकता है।

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