
रामनगर। अतिथि शिक्षकों का दर्द अब हद पार कर चुका है। सरकार कहती है 10 से 18 हजार मानदेय दे रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि ऐप में नेटवर्क नहीं पकड़ा, GPS ने लोकेशन नहीं ली, सर्वर डाउन रहा तो उसी दिन का मानदेय काट लिया जाता है। महीने में 4-5 दिन की कटौती आम बात है। हाथ में 8 हजार भी नहीं आता।
अतिथि शिक्षक सुबह 10 बजे से तक स्कूल पहुंचकर "हमारे शिक्षक ऐप" से जद्दोजहद करता है। कभी फोटो अपलोड नहीं होती, कभी चेहरे का वेरिफिकेशन फेल। आधा समय पढ़ाने में नहीं, ऐप से लड़ने में निकल जाता है। और यदि गलती से हाजिरी नहीं लगी तो बाबू कहता है "एब्सेंट लग गया, अब कुछ नहीं होगा।"
विभाग का नया फरमान कहता है कि अतिथि शिक्षक Fake GPS और रिकॉर्डेड वीडियो से हाजिरी लगा रहे हैं, इसलिए अब बर्खास्तगी और वसूली होगी। सवाल यह है कि क्या सिर्फ अतिथि शिक्षक ही फर्जी है?
जमीनी हकीकत सब जानते हैं। कई स्कूलों में पूरा काम अतिथि के भरोसे चलता है। लेकिन ऐप की निगरानी, ऑडिट, ब्लैकलिस्ट का डर सिर्फ अतिथि के लिए है। नियमित शिक्षक तो साहब हैं, उन पर कोई ऐप लागू नहीं, कोई GPS नहीं, कोई वसूली नहीं।
आकाओं ने बड़ी चालाकी से पूरी व्यवस्था का ठीकरा अतिथि पर फोड़ दिया है। खुद की नाकामी, शिक्षकों की कमी, ट्रांसफर-प्रतिनियुक्ति का खेल, सब छुपाने के लिए अतिथि को फर्जी घोषित कर दो और नियमितों को क्लीन चिट दे दो।
अतिथि पूछ रहा है - जब हम फर्जी हैं तो 10 साल से आपके स्कूलों में पढ़ा कौन रहा है? जब हम फर्जी हैं तो बोर्ड के रिजल्ट में 70-80% रिजल्ट ला कौन रहा है?
सरकार को चाहिए कि पहले सभी के लिए एक नियम बनाए। यदि हाजिरी ऐप से ही लेनी है तो नियमित और अतिथि दोनों की लो। यदि ऑडिट करना है तो दोनों का करो। सिर्फ गरीब अतिथि को चोर साबित करके अपनी पीठ थपथपाना बंद करो।
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