
रतलाम जिले अंतर्गत पलसोड़ी गांव में गुरुवार शाम एक अत्यंत हृदयविदारक घटना सामने आई, जहां घर के आंगन में खेल रही महज 3 वर्षीय मासूम बच्ची पर आवारा कुत्तों के झुंड ने हमला कर दिया। कुत्तों द्वारा बुरी तरह नोचे जाने से गंभीर रूप से लहूलुहान हुई बच्ची को परिजन आनन-फानन में रतलाम जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने परीक्षण के उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया। मृतका की पहचान मनीषा के रूप में हुई है, जो अपने दादा-दादी के संरक्षण में गांव में रह रही थी, जबकि उसके माता-पिता आजीविका के सिलसिले में करीब एक माह पूर्व राजस्थान के अजमेर मजदूरी करने गए हुए थे।
घटना के समय बच्ची के दादा-दादी कुछ ही दूरी पर स्थित खेत में कृषि कार्य में व्यस्त थे। इसी दौरान दो से तीन हिंसक आवारा कुत्तों ने घर के आंगन में अकेली खेल रही मनीषा पर हमला बोल दिया। बच्ची की चीख-पुकार सुनकर जब तक आसपास के पड़ोसी मौके पर पहुंचे और लाठियों से कुत्तों को खदेड़ा, तब तक कुत्ते मासूम की पीठ और पसलियों पर गहरे घाव कर चुके थे। दीनदयाल नगर थाना पुलिस ने सूचना मिलने पर मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए रतलाम मेडिकल कॉलेज भेजा और आवश्यक वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है।
रतलाम जिले में आवारा कुत्तों और स्ट्रीट डॉग बाइटिंग का आतंक लगातार विकराल रूप लेता जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 लोग कुत्तों के काटने का शिकार होकर उपचार और एंटी-रेबीज इंजेक्शन के लिए पहुंच रहे हैं। करीब एक वर्ष पूर्व भी रतलाम के शायर चबूतरा क्षेत्र में शाहरुख हुसैन नामक युवक की कुत्ते के काटने के बाद रेबीज संक्रमण से दर्दनाक मौत हो चुकी है। इसके अलावा शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे बच्चों पर कुत्तों के जानलेवा हमलों की एक दर्जन से अधिक घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं।
लगातार हो रही इन गंभीर घटनाओं के बावजूद नगर निगम और ग्रामीण पंचायतों के पास आवारा कुत्तों की नसबंदी और उनके नियंत्रण को लेकर कोई ठोस कार्ययोजना नजर नहीं आ रही है। स्थानीय नागरिकों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि रिहायशी बस्तियों में घूम रहे खूंखार कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई हेल्पलाइन या सतत अभियान संचालित नहीं किया जा रहा, जिसके चलते निर्दोष बच्चों और राहगीरों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है।
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