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शहडोल लोकायुक्त की कार्रवाई में खुलासा, 5000 की रिश्वत लेते पकड़ा गया संविदा डॉक्टर, एक साथ 3 जिलों से उठा रहा था 1.95 लाख सैलरी


शहडोल/भोपाल: मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में एक ऐसा अनोखा और हैरान कर देने वाला महाफर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसने पूरी व्यवस्था और मॉनिटरिंग सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहडोल में लोकायुक्त पुलिस द्वारा 5,000 की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किए गए संविदा डॉक्टर महेशचंद्र शर्मा को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। विभागीय जांच और दस्तावेजों की पड़ताल में यह बात सामने आई है कि डॉ. शर्मा एक ही समय में मध्य प्रदेश के तीन अलग-अलग जिलों—श्योपुर, खरगोन और शहडोल में संविदा डॉक्टर के पद पर पदस्थ थे और तीनों ही जगहों से नियमित रूप से वेतन उठा रहे थे।

हर महीने 1.95 लाख की सरकारी चपत जांच में खुलासा हुआ कि डॉ. महेशचंद्र शर्मा को तीनों जिलों के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से 65-65 हजार प्रति माह का संविदा मानदेय (सैलरी) मिल रहा था। इस तरह वह सरकार की आंखों में धूल झोंककर हर महीने कुल 1,95,000 की मोटी रकम अवैध रूप से कमा रहे थे। स्वास्थ्य विभाग के डिजिटल युग में एक ही डॉक्टर का तीन अलग-अलग दूरस्थ जिलों में एक साथ एक्टिव रहना और तीनों जगह से मानदेय जारी होना, विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत या बेहद लचर कार्यप्रणाली को दर्शाता है।

साल 2021 से शुरू हुआ नियुक्तियों का यह खेल दस्तावेजों के अनुसार, इस पूरे खेल की शुरुआत साल 2021 में हुई थी, जब डॉ. शर्मा ने श्योपुर जिले के सहसराम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में संविदा चिकित्सक के रूप में पहली जॉइनिंग ली। इस नौकरी में रहते हुए ही उन्होंने चालाकी से 14 फरवरी 2023 को खरगोन जिले के सेगांव ब्लॉक स्थित केली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भी संविदा डॉक्टर के पद पर कार्यभार संभाल लिया। इतने से भी मन नहीं भरा, तो उन्होंने 9 फरवरी 2026 को शहडोल जिले के ऊफरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में अपनी तीसरी संविदा नौकरी जॉइन कर ली।

खरगोन में सिर्फ हाजिरी, ड्यूटी से रहते थे गायब जांच टीम को पता चला है कि खरगोन के केली अस्पताल में डॉ. शर्मा की सप्ताह में तीन दिन की ड्यूटी तय की गई थी। लेकिन वे कभी भी नियमित रूप से अस्पताल नहीं जाते थे। आरोप है कि स्थानीय स्तर पर साठगांठ कर केवल उनकी हाजिरी दर्ज की जाती थी और वे घर बैठे वेतन का लाभ ले रहे थे। लगातार अनुपस्थिति और लापरवाही के कारण ही विभाग ने उनका मई महीने का वेतन रोका था और उन्हें दो नोटिस भी जारी किए थे। इसके अलावा, बीती 8 जून 2026 को एक प्रसूता की मौत के मामले में भी लापरवाही पाए जाने पर उन्हें कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस थमाया गया था।

रिश्वत कांड के बाद खुला 'ट्रिपल रोल' का राज इस पूरे महाघोटाले का पर्दाफाश तब हुआ, जब बीती 3 जुलाई को शहडोल में लोकायुक्त की टीम ने डॉ. शर्मा को एक स्वास्थ्य कर्मचारी का ट्रांसफर आदेश रद्द कराने के नाम पर 5,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोचा। गिरफ्तारी के बाद जब लोकायुक्त और स्वास्थ्य विभाग ने उनके पिछले रिकॉर्ड्स, बायोडाटा और क्रेडेंशियल्स की बारीकी से जांच शुरू की, तब जाकर इस 'ट्रिपल रोल' वाले फर्जीवाड़े की परतें खुलीं।

वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी जा रही रिपोर्ट इस गंभीर मामले को लेकर खरगोन के सीएमएचओ डॉ. डी.एस. चौहान ने बताया कि डॉक्टर के इस कृत्य की विस्तृत और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) भोपाल को भेजी जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि यह सीधे तौर पर सरकारी धन के गबन और धोखाधड़ी का मामला है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी डॉक्टर के खिलाफ जालसाजी की विभिन्न धाराओं में एफआईआर (FIR) दर्ज कराई जाएगी और उनकी संविदा सेवाएं तुरंत समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।

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