
रीवा जिले में पंचायतों के भीतर वित्तीय गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के मामलों में जिला पंचायत प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। सोहागी ग्राम पंचायत के सरपंच को पद से बर्खास्त कर दिया गया है, वहीं दो अन्य ग्राम पंचायतों के पूर्व सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक के खिलाफ सीधे जेल वारंट जारी किए गए हैं। जिला पंचायत की इस सख्त कार्रवाई से जिले के भ्रष्ट अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों में हड़कंप मच गया है।
इस रीवा पंचायत भ्रष्टाचार मामले में त्योंथर जनपद की सोहागी ग्राम पंचायत के सरपंच शेषमणि मिश्र को मध्य प्रदेश पंचायती राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा 40 के तहत पद से हटा दिया गया है। जांच में सामने आया कि सरपंच ने नियमों को ताक पर रखकर अपने ही बेटे आशुतोष मिश्र को वेंडर बना दिया और उसके जरिए करीब ₹35.17 लाख का अवैध भुगतान कराया। इस गंभीर वित्तीय अनियमितता में शामिल पंचायत सचिव मनपूर्ण प्रसाद शुक्ल को भी सस्पेंड कर दिया गया है।
जिला पंचायत सीईओ मेहताब सिंह गुर्जर ने सख्त रुख अपनाते हुए शासकीय राशि का गबन करने वाले तीन अन्य लोगों के खिलाफ जेल वारंट जारी किया है। इनमें शामिल हैं:
रावेंद्र सिंह: पूर्व सरपंच, ग्राम पंचायत देवरा कोठार
राजबहोर यादव: तत्कालीन सचिव, ग्राम पंचायत फरहदी
नारायण प्रसाद मिश्रा: ग्राम रोजगार सहायक, ग्राम पंचायत फरहदी
इन तीनों पर विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोप सिद्ध हुए थे। प्रशासन द्वारा रिकवरी के आदेश दिए जाने के बाद भी जब इन्होंने राशि जमा नहीं की, तब पंचायत राज अधिनियम की धारा 92 के तहत यह जेल वारंट जारी किया गया।
जिले में रीवा पंचायत भ्रष्टाचार से जुड़े कई पुराने मामले भी अब प्रशासन के रडार पर हैं। कई पूर्व सरपंचों और सचिवों के खिलाफ पहले भी रिकवरी और वारंट जारी हो चुके हैं, लेकिन उन पर अब तक पूरी कार्रवाई नहीं हो सकी थी। जिला पंचायत प्रशासन के इस कड़े रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में लंबित पड़े मामलों के आरोपियों को भी सलाखों के पीछे भेजा जाएगा।
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