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रीमा कागती से जोया अख्तर तक; फीमेल डायरेक्टर्स जिन्होंने सिनेमा जगत को बनाया संवेदनशील और सशक्त

मुंबई, 8 मार्च (आईएएनएस)। कहते हैं कि सफल पुरुष के पीछे एक महिला का हाथ होता है, लेकिन बॉलीवुड में सफल फिल्मों के पीछे महिलाओं का हाथ न केवल सहारा दे रहा है, बल्कि कहानी को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है। पुरुष-प्रधान इंडस्ट्री में ये महिला फिल्म निर्माता अपनी संवेदनशीलता, साहस और क्रिएटिविटी से समाज के मुद्दों को पर्दे पर ला रही हैं, दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर रही हैं और सफलता के नए मानक गढ़ रही हैं।

मुंबई, 8 मार्च (आईएएनएस)। कहते हैं कि सफल पुरुष के पीछे एक महिला का हाथ होता है, लेकिन बॉलीवुड में सफल फिल्मों के पीछे महिलाओं का हाथ न केवल सहारा दे रहा है, बल्कि कहानी को नई ऊंचाइयों तक ले जा रहा है। पुरुष-प्रधान इंडस्ट्री में ये महिला फिल्म निर्माता अपनी संवेदनशीलता, साहस और क्रिएटिविटी से समाज के मुद्दों को पर्दे पर ला रही हैं, दर्शकों को सोचने पर मजबूर कर रही हैं और सफलता के नए मानक गढ़ रही हैं।

अक्षय कुमार की 'गोल्ड' से लेकर ऑस्कर में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली 'लापता लेडीज' तक, इन महिलाओं ने दिखाया है कि निर्देशन में जेंडर कोई बाधा नहीं।

रीमा कागती फिल्म इंडस्ट्री की जाना-माना नाम हैं। उन्होंने साल 2007 में मल्टीस्टारर 'हनीमून ट्रैवल्स प्राइवेट लिमिटेड' से निर्देशन की शुरुआत की, जो कमर्शियल सफल रही। साल 2012 में आमिर खान और रानी मुखर्जी की 'तलाश' को निर्देशित किया, जो सराही गई। साल 2018 में अक्षय कुमार स्टारर स्पोर्ट्स-ड्रामा 'गोल्ड' आई। रीमा ने जॉया अख्तर के साथ टाइगर बेबी फिल्म्स की सह-स्थापना की और 'दहाड़' जैसी वेब सीरीज भी निर्देशित कीं। उनकी फिल्में गहन कहानी और मजबूत स्क्रीनप्ले के लिए जानी जाती हैं।

किरण राव पटकथा लेखिका और निर्देशक के रूप में मशहूर हैं। साल 2011 में 'धोबीघाट' से निर्देशन की शुरुआत की, जिसमें प्रतीक बब्बर और अन्य कलाकारों ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। यह फिल्म मुंबई की जिंदगी और कला को खूबसूरती से पर्दे पर पेश करती है। उनकी फिल्म 'लापता लेडीज' ने खासा धमाल मचाया। ग्रामीण भारत में दो दुल्हनों की गलतफहमी पर आधारित यह फिल्म महिला सशक्तीकरण पर खुलकर बोलती है। फिल्म की थीम को देश में सराहना मिली और 97वें ऑस्कर के लिए भारत की ऑफिशियल एंट्री भी बनी। हालांकि, शॉर्टलिस्ट में नहीं आई।

गीतकार गुलजार की बेटी मेघना गुलजार लेखन और निर्देशन में विरासत आगे बढ़ा रही हैं। साल 2015 में नोएडा डबल मर्डर केस पर आधारित 'तलवार' निर्देशित की, जिसके लिए फिल्मफेयर में बेस्ट डायरेक्टर नामांकन मिला। साल 2018 में 'राजी' आई, जिसमें आलिया भट्ट और विक्की कौशल थे। फिल्म ने फिल्मफेयर बेस्ट फिल्म तो मेघना को बेस्ट डायरेक्टर का अवॉर्ड मिला। साल 2020 में एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की बायोपिक 'छपाक' में दीपिका पादुकोण और विक्रांत मैसी ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। साल 2023 में 'सैम बहादुर' में विक्की कौशल ने सैन्य अधिकारी सैम मानेकशॉ का किरदार निभाया, जो बॉक्स ऑफिस हिट रही और नेशनल अवॉर्ड भी मिला। मेघना की फिल्में सामाजिक मुद्दों पर गहन और प्रभावशाली होती हैं।

इसके अलावा जोया अख्तर, तनुजा चंद्रा, अपर्णा सेन, मीरा नायर, दीपा मेहता, फातिमा बेगम, संध्या सूरी और आरती कदव जैसी निर्देशक भी इंडस्ट्री में मजबूत योगदान दे रही हैं। ये महिलाएं साबित कर रही हैं कि निर्देशन में भावना, साहस और दृष्टिकोण से फिल्में न केवल सफल होती हैं, बल्कि समाज को बदलने की ताकत रखती हैं।

--आईएएनएस

एमटी/एएस

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