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सागर: 5 हजार की रिश्वत लेते वनरक्षक गिरफ्तार, लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई

सागर जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। गुरुवार को लोकायुक्त पुलिस की टीम ने एक वनरक्षक को लकड़ी व्यापारी से रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया। आरोपी वनरक्षक लकड़ी परिवहन की अनुमति देने और काम में बाधा न डालने के बदले हर महीने अवैध वसूली की मांग कर रहा था। इस कार्रवाई के बाद से वन विभाग के गलियारों में हड़कंप मच गया है।

मिश्रा तिराहे पर बिछाया गया लोकायुक्त का जाल

लोकायुक्त टीम से मिली जानकारी के अनुसार, कुण्डेश्वर बीट में पदस्थ वनरक्षक अरुण अहिरवार को शहर के मिश्रा तिराहे से गिरफ्तार किया गया। आरोपी ने लकड़ी व्यापारी से परिवहन की अनुमति के बदले 5 हजार रुपये की मांग की थी। जैसे ही व्यापारी ने पैसे दिए, पहले से तैयार लोकायुक्त की टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया। बताया जा रहा है कि आरोपी कुल 20 हजार रुपये की मांग कर रहा था, जिसकी पहली किस्त लेते हुए वह पकड़ा गया।

लकड़ी व्यापारी ने दर्ज कराई थी शिकायत

इस मामले में उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले के बानपुर निवासी अरबाज खान ने सागर लोकायुक्त कार्यालय में लिखित शिकायत दी थी। अरबाज किसानों से लकड़ी खरीदकर फर्नीचर बनाने का व्यवसाय करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अरुण अहिरवार उन्हें लकड़ी ले जाने में परेशान करता था और मासिक "एंट्री" के नाम पर पैसों का दबाव बनाता था। पैसे न देने पर वनरक्षक द्वारा कानूनी कार्रवाई करने और गाड़ी जब्त करने की धमकियां दी जाती थीं।

पूर्व में भी जब्त किया था वाहन

शिकायतकर्ता अरबाज खान ने बताया कि यह पहली बार नहीं था जब वनरक्षक ने उन्हें प्रताड़ित किया। पूर्व में रिश्वत न देने पर आरोपी ने लकड़ी से भरा हुआ उनका वाहन जब्त कर लिया था। उस वक्त गाड़ी को छुड़ाने के नाम पर वनरक्षक ने 10 हजार रुपये की अवैध वसूली की थी। बार-बार की जा रही इस जबरन वसूली से तंग आकर व्यापारी ने लोकायुक्त का सहारा लेने का फैसला किया।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज

लोकायुक्त टीम ने आरोपी वनरक्षक के हाथ धुलवाए, तो वे गुलाबी हो गए, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई। गिरफ्तारी के बाद आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। फिलहाल पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस सिंडिकेट में विभाग के अन्य कर्मचारी भी शामिल थे।

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