
सागर। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के मुहली परिक्षेत्र में हाल ही में एक मजदूर और महिला वनरक्षक पर हमला करने वाले वन्यजीव की पहचान हो गई है। पगमार्क और जांच के आधार पर वन विभाग ने पुष्टि की है कि हमला करने वाला कोई और नहीं बल्कि एक शावक बाघिन है। हमले के बाद मुस्तैद हुए वन विभाग ने हाथियों के दल की मदद से सर्चिंग ऑपरेशन चलाया और आखिरकार इस शावक बाघिन का रेस्क्यू सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है।
वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर रजनीश कुमार ने बताया कि पकड़ी गई शावक बाघिन की उम्र करीब 15 से 18 महीने है। अन्य शावकों के साथ आपसी लड़ाई (फाइट) के दौरान उसके पिछले पैरों में गंभीर चोट लग गई थी, जिसकी वजह से उसके पैरों में भारी सूजन थी और वह सामान्य रूप से चलने में असहज महसूस कर रही थी। पैरों में चोट होने के कारण वह काफी दिनों से जंगल में शिकार नहीं कर पा रही थी और भूखी थी। इसी भूख और लाचारी के चलते उसने वन कर्मियों पर हमला कर दिया था। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इसके पहले एक किसान पर हमला करने वाला बाघ इस बाघिन से अलग है, जिसकी तलाश अभी जारी है।
घायल वन्यजीव की गंभीर स्थिति को देखते हुए सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के वन्य प्राणी विशेषज्ञ एवं चिकित्सक डॉ. गुरुदत्त शर्मा और सेंटर फॉर वाइल्ड लाइफ हेल्थ एंड फॉरेंसिक जबलपुर की टीम को विशेष रूप से मौके पर बुलाया गया। डॉक्टरों और विशेषज्ञों के इस संयुक्त दल ने हाथियों की मदद से घने जंगल में बाघिन की दोबारा सर्चिंग की। सटीक लोकेशन मिलने पर दल द्वारा पूरी सावधानी बरतते हुए शावक बाघिन का रेस्क्यू करने के लिए उसे ट्रेंकुलाइज (बेहोश) किया गया।
सफलतापूर्वक ट्रेंकुलाइज किए जाने के बाद डॉक्टरों की टीम ने बाघिन का प्रारंभिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। जांच में सामने आया कि बाघिन का पेट पूरी तरह से खाली था, जो यह साबित करता है कि वह कई दिनों से भूखी थी। उचित और विस्तृत इलाज के लिए अब उसे सेंटर फॉर वाइल्डलाइफ हेल्थ एंड फॉरेंसिक जबलपुर भेज दिया गया है। मुख्य वन्य प्राणी अभिरक्षक को भी इस पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन और बाघिन के स्वास्थ्य से जुड़ी पल-पल की जानकारी दे दी गई है।
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