
मुंबई. महाराष्ट्र सरकार ने राज्य की भाषाई अस्मिता को मजबूती देने के लिए कड़ा रुख अख्तियार किया है। स्कूल शिक्षा विभाग ने एक नया शासनादेश (GR) जारी कर राज्य के सभी स्कूलों में कक्षा 1 से 10वीं तक मराठी भाषा को अनिवार्य विषय के रूप में पढ़ाना अनिवार्य कर दिया है। यह नियम केवल स्टेट बोर्ड ही नहीं, बल्कि CBSE, ICSE और इंटरनेशनल बोर्ड्स पर भी समान रूप से लागू होगा।
नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने जुर्माने और कार्रवाई की सख्त समय सीमा तय की है:
1 लाख का जुर्माना: यदि कोई स्कूल मराठी नहीं पढ़ाता है, तो उस पर 1 लाख तक का आर्थिक दंड लगाया जाएगा।
मान्यता होगी रद्द: बार-बार नियमों की अनदेखी करने वाले स्कूलों की अगले शैक्षणिक सत्र से मान्यता रद्द कर दी जाएगी।
नोटिस प्रक्रिया: दोषी स्कूलों को 15 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण देना होगा। हालांकि, स्कूलों को फैसले के खिलाफ 30 दिनों में अपील करने का अधिकार भी होगा।
अब तक कई केंद्रीय और अंतरराष्ट्रीय बोर्डों में मराठी केवल कक्षा 8 तक ही पढ़ाई जाती थी। लेकिन 'महाराष्ट्र अनिवार्य मराठी भाषा शिक्षण और सीखना अधिनियम, 2020' के तहत अब इसे 10वीं तक पढ़ाना कानूनी रूप से अनिवार्य है। सर्वे में यह बात सामने आई थी कि मुंबई, ठाणे और पुणे के कई निजी स्कूलों ने अब तक न तो मराठी विषय शुरू किया है और न ही योग्य शिक्षकों की नियुक्ति की है।
मराठी अभ्यास केंद्र के संस्थापक दीपक पवार और अन्य शिक्षाविदों ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। हालांकि, उन्होंने मांग की है कि:
वर्तमान की 'ग्रेडिंग प्रणाली' और '50 अंकों' के मूल्यांकन से इस विषय का महत्व कम होता है।
इसे बोर्ड परीक्षाओं में 100 अंकों का अनिवार्य पेपर बनाया जाना चाहिए ताकि छात्र इसे गंभीरता से लें।
गौरतलब है कि महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के लिए भी मराठी अनिवार्य करने का फैसला लिया है। 1 मई 2026 से यह नियम लागू होगा, जिसके तहत भाषा न आने पर लाइसेंस रद्द करने की कार्रवाई की जा सकती है।
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