
नई दिल्ली. भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने साल 2026 के मानसून का पहला आधिकारिक पूर्वानुमान जारी कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून दीर्घकालिक औसत (LPA) का केवल 92% रहने की संभावना है। 90 से 95 फीसदी के बीच की बारिश को 'सामान्य से कम' श्रेणी में रखा जाता है, जो सूखे जैसी स्थिति का संकेत हो सकती है।
अल नीनो बनाम आईओडी: जून में प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति उभरने के कारण मानसून कमजोर पड़ सकता है। हालांकि, हिंद महासागर में सकारात्मक द्विध्रुव (Positive IOD) बनने की उम्मीद है, जो मानसून के दूसरे भाग में अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकता है।
क्षेत्रीय वितरण: उत्तर-पश्चिम, पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों को छोड़कर देश के अधिकांश हिस्सों में औसत से कम बारिश होने की आशंका है।
कृषि पर सीधा प्रहार: भारत की 64% आबादी और 50% से अधिक खेती मानसून पर निर्भर है। कम बारिश से धान, दालों और तिलहन की बुवाई प्रभावित होगी, जिससे पैदावार में गिरावट आ सकती है।
महंगाई का डर: फसल उत्पादन घटने से खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं, जिससे ग्रामीण आय कम होगी और देश की GDP विकास दर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
एक तरफ मानसून की चिंता है, तो दूसरी तरफ उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में लू (Heatwave) का प्रकोप शुरू हो गया है। सौराष्ट्र, कच्छ, ओडिशा और छत्तीसगढ़ में पारा सामान्य से 4-6 डिग्री ऊपर जा सकता है।
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