
शहडोल जिले में रेत के वैध ठेके न होने का खामियाजा अब जानलेवा हादसों के रूप में सामने आ रहा है। ताजा मामला संभागीय मुख्यालय से सटे सोहागपुर थाना क्षेत्र के बिजौरी का है, जहाँ अवैध रेत उत्खनन के दौरान माइनिंग टीम की दबिश की सूचना मिलते ही अफरा-तफरी मच गई। कार्रवाई से बचने के लिए तेज रफ्तार में भाग रहा रेत से भरा ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर पलट गया। इस भीषण हादसे में ट्रैक्टर पर सवार 8 मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं, जिनमें से 3 की हालत नाजुक बनी हुई है।
घायलों की पहचान अमन बैगा, दैय्या (50 वर्ष), रनिया, बुदनी, शनि (17 वर्ष), संतु (16 वर्ष), गणेश और सूरज (24 वर्ष) के रूप में हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिजौरी स्थित नदी से अवैध उत्खनन का खेल लंबे समय से जारी है। हादसे के वक्त मजदूर ट्रैक्टर में रेत लोड कर रहे थे, तभी माइनिंग टीम के आने की खबर मिली। ड्राइवर ने पकड़े जाने के डर से ट्रैक्टर को तेजी से दौड़ाया, लेकिन संतुलन खोने के कारण वाहन पलट गया और मजदूर उसके नीचे दब गए। पुलिसिया कार्रवाई से बचने के लिए माफिया ने घायलों को सरकारी अस्पताल न ले जाकर एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया है, जहाँ गणेश समेत तीन मजदूरों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
शहडोल जिले में रेत का अवैध कारोबार इस कदर बेखौफ है कि संभागीय मुख्यालय में वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद नदी-नालों का सीना चीरा जा रहा है। यह इलाका पहले भी रेत माफिया के खूनी खेल का गवाह रहा है, जहाँ एक पटवारी और एक पुलिस एएसआई की कुचलकर हत्या की जा चुकी है। इसके अलावा तहसीलदार, वन विभाग और माइनिंग टीमों पर हमले की घटनाएं भी आम हो चुकी हैं। स्थानीय प्रशासन की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए लोगों का कहना है कि पुलिस और संबंधित विभाग प्रभावी कार्रवाई करने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहे हैं।
वर्तमान में जिले में रेत के वैध ठेके न होने के कारण माफिया सक्रिय हैं, जो न केवल सरकारी राजस्व को चूना लगा रहे हैं बल्कि मजदूरों की जान को भी जोखिम में डाल रहे हैं। बिजौरी का यह हादसा प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि यदि समय रहते अवैध उत्खनन पर नकेल नहीं कसी गई, तो भविष्य में और भी बड़े जानलेवा हादसे हो सकते हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और घायलों का उपचार निजी अस्पताल में जारी है।
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