
शाजापुर जिले के शुजालपुर अनुभाग अंतर्गत कालापीपल तहसील के खरदौनकलां गांव में एक हृदयविदारक घटना सामने आई है। यहाँ एक खेत में बने कुएं से 13 हिरणों और एक आवारा कुत्ते के सड़े-गले शव बरामद हुए हैं। घटना के बाद से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई है कि आवारा कुत्ते से अपनी जान बचाकर भागने के प्रयास में हिरणों का यह झुंड कुएं में जा गिरा।
खेत में कीटनाशक छिड़काव के दौरान हुआ खुलासा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, खरदौनकलां निवासी कृष्णाबाई पति राजेश पाटीदार के परिजन रविवार को अपने खेत में कीटनाशक का छिड़काव करने पहुंचे थे। इसी दौरान कुएं से असहनीय दुर्गंध आने पर जब उन्होंने कुएं के भीतर झांककर देखा, तो उनके होश उड़ गए। कुएं में बड़ी संख्या में वन्यजीवों के सड़े-गले शव तैर रहे थे। शवों की स्थिति को देखकर अनुमान लगाया जा रहा है कि यह हादसा दो से तीन दिन पुराना है। खेत मालिक ने तुरंत इसकी सूचना ग्राम सरपंच को दी, जिसके बाद पुलिस और वन विभाग की टीम को मौके पर बुलाया गया।
क्षतिग्रस्त मुंडेर बनी काल, 4 नर और 9 मादा हिरणों की मौत
ग्रामीणों के मुताबिक, कुएं की सुरक्षा के लिए मुंडेर तो बनी हुई थी, लेकिन उसका एक हिस्सा काफी समय से क्षतिग्रस्त (टूटा हुआ) था। वन विभाग की प्रारंभिक जांच के अनुसार, हिरणों का झुंड किसी आवारा श्वान (कुत्ते) से बचने के लिए अंधाधुंध और बेहद तेज रफ्तार में दौड़ रहा था। इसी अंधी दौड़ के चलते पूरा झुंड कुएं के उसी टूटे हुए हिस्से से सीधे गहरे पानी में जा गिरा। हिरणों का पीछा कर रहा कुत्ता भी खुद को नियंत्रित नहीं कर पाया और वह भी कुएं में गिर गया, जिससे सभी की डूबने से मौत हो गई। मृत हिरणों में 4 नर और 9 मादा शामिल हैं।
अफसर की अनुपस्थिति के कारण शव निकालने में हुई देरी
हिरण वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 में शामिल एक बेहद संरक्षित वन्यजीव हैं, जिसके कारण नियमानुसार किसी वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी में ही पंचनामा और शव निकालने की कार्रवाई की जा सकती है। रविवार को सूचना मिलने के बावजूद, वन विभाग के सब-डिवीजनल ऑफिसर (SDO) के विभागीय कार्य से रतलाम में होने के कारण शवों को रविवार को नहीं निकाला जा सका। सोमवार को नायब तहसीलदार की उपस्थिति में सभी 14 शवों को बाहर निकाला गया। डॉक्टरों के पैनल द्वारा पोस्टमार्टम किए जाने के बाद घटनास्थल के समीप ही सभी का अंतिम संस्कार कर दिया गया।
विभाग पर जानकारी छुपाने का आरोप, दो महीने पहले हुआ था करोड़ों का रेस्क्यू
इस पूरी कार्रवाई के दौरान वन विभाग ने आम लोगों और ग्रामीणों को घटनास्थल से काफी दूर रखा, जिसे लेकर ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि विभाग इस गंभीर हादसे की जानकारी को सार्वजनिक होने से रोकने और मामले को दबाने की कोशिश कर रहा था।
गौरतलब है कि कालापीपल-शुजालपुर क्षेत्र हिरणों की एक बड़ी आबादी के लिए जाना जाता है। फसलों को नुकसान से बचाने के लिए करीब दो महीने पहले ही वन विभाग ने 'बोमा पद्धति' के तहत हेलीकॉप्टर की मदद से लगभग 800 हिरणों को अन्य वन अभ्यारण्यों में स्थानांतरित (शिफ्ट) किया था। इस बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद भी खेतों में असुरक्षित और खुले पड़े कुएं अब इन बेजुबान वन्यजीवों के लिए काल साबित हो रहे हैं। वन विभाग का कहना है कि मौत के वास्तविक कारणों की शत-प्रतिशत पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
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