
सीधी। रीवा लोकायुक्त पुलिस की टीम ने बुधवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए सीधी जिले की गोपद बनास तहसील में पदस्थ एक भृत्य (चपरासी) को 3,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपी चपरासी ने यह रिश्वत जमीन के नामांतरण और वसीयत के काम के एवज में मांगी थी। लोकायुक्त की टीम ने आरोपी को तहसील कार्यालय के मुख्य गेट के बाहर से दबोचा।
मामले का खुलासा तब हुआ जब ग्राम खजुरी के रहने वाले बुजुर्ग शिकायतकर्ता नागेंद्र तिवारी ने लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई। नागेंद्र तिवारी की जमीन ग्राम बेदुआ में स्थित है, जिसके नामांतरण और वसीयत (वारिसाना) संबंधी कार्य के लिए उन्होंने जनवरी महीने में तहसील कार्यालय में आवेदन किया था।
शिकायतकर्ता ने बताया कि इस काम के लिए उनसे लगातार पैसों की मांग की जा रही थी। उन्होंने कहा:
"मैं दामोदर प्रसाद साकेत को कार्यालय का बाबू समझ रहा था, लेकिन लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद मुझे पता चला कि वह वास्तव में एक भृत्य (चपरासी) के पद पर तैनात है।"
चपरासी दामोदर प्रसाद साकेत द्वारा 3,000 की रिश्वत मांगे जाने से परेशान होकर बुजुर्ग ने रीवा लोकायुक्त कार्यालय का दरवाजा खटखटाया। लोकायुक्त टीम ने शिकायत का प्रारंभिक सत्यापन (Verification) कराया, जो सही पाई गई।
बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे जैसे ही योजना के मुताबिक नागेंद्र तिवारी ने तहसील कार्यालय के गेट के बाहर आरोपी दामोदर को 3,000 की रकम सौंपी, पहले से मुस्तैद लोकायुक्त की टीम ने उसे रंगे हाथों दबोच लिया।
कार्रवाई की पुष्टि करते हुए लोकायुक्त निरीक्षक रमेश बेहरा ने बताया कि नामांतरण और वसीयत से जुड़े कार्य के लिए रिश्वत मांगने की शिकायत मिली थी, जिसका सत्यापन कराने के बाद यह ट्रैप कार्रवाई की गई है। आरोपी भृत्य दामोदर प्रसाद साकेत के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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