नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। सोनिया गांधी के दामाद और व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा को दिल्ली हाई कोर्ट से गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में 2008 के एक जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तत्काल राहत नहीं मिली।
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नई दिल्ली, 14 मई (आईएएनएस)। सोनिया गांधी के दामाद और व्यवसायी रॉबर्ट वाड्रा को दिल्ली हाई कोर्ट से गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में 2008 के एक जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में तत्काल राहत नहीं मिली।
जस्टिस मनोज जैन की एकल-न्यायाधीश पीठ रॉबर्ट वाड्रा की उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें उन्होंने राऊज एवेन्यू कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी की शिकायत का संज्ञान लेते हुए उन्हें और आठ अन्य लोगों को समन जारी किया था।
सुनवाई के दौरान, वाड्रा की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मूल मामले में लगाए गए कुछ अपराधों को, 2008 और 2012 के बीच कथित तौर पर अपराध किए जाने के बाद पीएमएलए की अनुसूची में जोड़ा गया था।
उन्होंने दलील दी कि अधिकार क्षेत्र और प्रावधानों के पूर्वव्यापी अनुप्रयोग से जुड़ा मुद्दा ट्रायल कोर्ट के सामने उठाया गया था, लेकिन उस पर कोई विचार नहीं किया गया।
याचिका का विरोध करते हुए ईडी के वकील जोहेब हुसैन ने कहा कि वाड्रा ने अपनी याचिका में झूठे और गलत बयान दिए हैं। हुसैन ने कहा कि इस याचिका को जुर्माने के साथ खारिज किया जाना चाहिए। मैंने सभी मूल कानूनों को खंगालने का काम किया है। ये पूरी तरह से झूठी दलीलें हैं। पीएमएलए की अनुसूची में धारा 467 आईपीसी अपने मूल रूप में ही मौजूद थी। साफ तौर पर, झूठे और गलत बयान दिए गए हैं।
दिल्ली हाई कोर्ट ने रॉबर्ट वाड्रा और ईडी की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई 18 मई के लिए टाल दी। जस्टिस जैन ने कहा, "मिस्टर सिंघवी, कृपया सोमवार को इस पहलू पर पूरी तैयारी के साथ आएं, क्योंकि यही आपका मुख्य आधार है। हम सोमवार को आपकी बात सुनेंगे।"
इससे पहले, 15 अप्रैल को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने ईडी की अभियोजन शिकायत का संज्ञान लेते हुए वाड्रा और आठ अन्य लोगों को समन जारी किया था। विशेष अदालत ने कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के पति वाड्रा और अन्य आरोपियों को 16 मई को अदालत के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था।
इसलिए, रॉबर्ट वाड्रा को जारी किए गए समन का पालन करते हुए, तय तारीख पर ट्रायल कोर्ट के सामने पेश होना होगा।
ईडी ने आरोप लगाया है कि वाड्रा की कंपनी 'स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड' ने फरवरी 2008 में हरियाणा के शिकोहपुर गांव में लगभग 3.5 एकड़ जमीन 'ओमकारेश्वर प्रॉपर्टीज़ प्राइवेट लिमिटेड' से 7.50 करोड़ रुपए में खरीदी थी, जबकि उनके पास पूंजी सीमित थी। जांच एजेंसी के अनुसार, कोई भी असल भुगतान नहीं किया गया था और बिक्री विलेख (सेल डीड) में झूठे बयान शामिल थे, जिसमें एक ऐसे चेक का जिक्र भी था जो कथित तौर पर कभी जारी ही नहीं किया गया या भुनाया नहीं गया।
ईडी ने आगे दावा किया है कि बिक्री विलेख में जमीन का मूल्य कम दिखाया गया था, जिसके परिणामस्वरूप स्टांप शुल्क की चोरी हुई और यह आईपीसी की धारा 423 के तहत एक अपराध है। अपनी अभियोजन शिकायत में ईडी ने 58 करोड़ रुपए को अपराध से प्राप्त आय के रूप में पहचाना है और 43 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है, जिनकी कीमत 38.69 करोड़ रुपए है।
--आईएएनएस
पीएसके
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