
जबलपुर. पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) के यांत्रिकी (मैकेनिकल) विभाग ने ट्रेनों के सुरक्षित संचालन और तकनीकी मानकों को लेकर कड़ा रुख अख्तियार किया है. मुख्यालय की जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि विभाग के 100 से ज्यादा मैकेनिकल सुपरवाइजरों ने वर्षों से अपना अनिवार्य रिफ्रेशर कोर्स नहीं किया है. इस लापरवाही को देखते हुए रेलवे ने इन सभी को तुरंत ट्रेनिंग केंद्रों पर भेजने का फरमान जारी कर दिया है.
3 साल का नियम, 6 साल से ड्यूटी: सुरक्षा पर सवाल?
रेलवे सुरक्षा नियमावली के अनुसार, प्रत्येक मैकेनिकल सुपरवाइजर को नई तकनीकों और बदलते सुरक्षा मानकों से अपडेट रहने के लिए हर 3 साल में 21 दिन का रिफ्रेशर कोर्स करना अनिवार्य होता है.
बड़ी लापरवाही: जांच में पाया गया कि जबलपुर, भोपाल और कोटा मंडल के कई सुपरवाइजरों ने पिछले 5 से 6 सालों से कोई ट्रेनिंग नहीं ली है और वे 'पुराने ढर्रे' पर ही काम कर रहे हैं.
सुरक्षा जोखिम: बिना अपडेटेड जानकारी के काम करने से न केवल रखरखाव में देरी होती है, बल्कि तकनीकी खामियों की संभावना भी बढ़ जाती है.
उदयपुर और भुसावल में होगी ट्रेनिंग
आदेश जारी होते ही तीनों मंडलों में हड़कंप मच गया है. इन कर्मचारियों को बैच बनाकर ट्रेनिंग के लिए भेजा जा रहा है:
मुख्य केंद्र: उदयपुर स्थित रेलवे ट्रेनिंग स्कूल और भुसावल केंद्रों पर यह 21 दिवसीय पाठ्यक्रम आयोजित किया जाएगा.
उद्देश्य: अत्याधुनिक तकनीकों से रूबरू कराना, इंजनों और डिब्बों के रखरखाव में सुधार लाना और सुरक्षा के आधुनिक मानकों को जमीनी स्तर पर लागू करना.
रेलवे अधिकारियों का रुख
रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी ज्ञान का अभाव सुरक्षा के साथ समझौता हो सकता है. आधुनिक युग में वंदे भारत और एलएचबी (LHB) जैसे कोचों के रख-रखाव के लिए अपडेटेड तकनीकी ज्ञान अनिवार्य है. रिफ्रेशर कोर्स पूरा करने के बाद ये कर्मचारी नई ऊर्जा और आधुनिक ज्ञान के साथ फील्ड पर लौटेंगे.
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