
छतरपुर। जिले के दौधन गांव में 'केन-बेतवा लिंक परियोजना' के तहत की जा रही अतिक्रमण विरोधी कार्रवाई ने हिंसक रूप ले लिया है। बुधवार को प्रशासन की टीम भारी पुलिस बल के साथ आदिवासियों के मकानों को जमींदोज करने पहुंची थी, जिसके बाद वहां भारी बवाल मच गया।
घटनाक्रम और ग्रामीणों के आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना मानवीय संवेदनाओं का ध्यान रखे आदिवासी परिवारों के घरों पर जेसीबी (JCB) चला दी। आरोप है कि जब बुलडोजर चलाया गया, तब एक परिवार अपने घर के अंदर ही मौजूद था। मकान गिरने से मलबे में दबकर पति-पत्नी और उनके दो मासूम बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में घायल आदिवासी शख्स "साहब बचा लीजिए" की गुहार लगाता नजर आ रहा है, जबकि उसके पास दो बच्चे बेसुध पड़े दिखाई दे रहे हैं।
प्रशासन का पलटवार: 'खून नहीं, रंग है' इस पूरे मामले में प्रशासन का रुख चौंकाने वाला है। कलेक्टर पार्थ जायसवाल और एसपी रजत सकलेचा ने ग्रामीणों के दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक सोची-समझी साजिश है। प्रशासन ने कुछ तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि ग्रामीणों ने जानबूझकर खुद पर और बच्चों पर 'लाल रंग' (कलर) डाला है ताकि कार्रवाई को रोका जा सके। एसपी के मुताबिक, न तो कोई ग्रामीण घायल हुआ है और न ही कोई कर्मचारी।
हिंसा और पथराव परिवार के घायल होने की खबर फैलते ही ग्रामीण आक्रोशित हो गए और उन्होंने प्रशासनिक अमले पर पथराव शुरू कर दिया। इस हमले में एडिशनल एसपी की गाड़ी, तहसीलदार का वाहन और जेसीबी मशीन समेत करीब 6 वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि टीम को कुछ समय के लिए पीछे हटना पड़ा।
परियोजना और वर्तमान स्थिति यह कार्रवाई केन-बेतवा लिंक परियोजना के डूब क्षेत्र से अतिक्रमण हटाने के लिए की जा रही थी। प्रशासन का कहना है कि पूर्व में कई बार नोटिस दिए गए थे। फिलहाल, गांव में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस बल तैनात किया गया है और पूरे इलाके को पुलिस छावनी में बदल दिया गया है। पुलिस अब पथराव और उपद्रव करने वालों की पहचान कर कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
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