
भोपाल में अब आम जनता को अपने प्रशासनिक कार्यों के लिए अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। जिला प्रशासन ने शहर के कायाकल्प और प्रशासनिक सुगमता के लिए एक महत्वाकांक्षी 'रिडेवलपमेंट प्लान' तैयार किया है। इसके तहत पुराने सचिवालय की 4.10 हेक्टेयर भूमि पर एक अत्याधुनिक सात मंजिला प्रशासनिक भवन का निर्माण किया जाएगा। हाउसिंग बोर्ड द्वारा तैयार की गई इस योजना पर करीब 283 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे, जिससे राजधानी की प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह डिजिटल और स्मार्ट स्वरूप लेगी।
इस नई योजना के तहत मौजूदा कलेक्ट्रेट, संभागायुक्त (कमिश्नर) और आईजी कार्यालय के पुराने ढांचों को तोड़कर एक विशाल परिसर विकसित किया जाएगा। पहले चरण में पुराने कलेक्ट्रेट, अभिलेखागार, अधिवक्ता हॉल और महिला एवं बाल विकास जैसे विभागों के पुराने भवनों को हटाया जाएगा। इस सात मंजिला इमारत में कलेक्टर कार्यालय, शस्त्र शाखा, जनसुनवाई कक्ष, लोकसेवा केंद्र, साइबर सेल, आबकारी, खाद्य आपूर्ति और खनिज विभाग समेत 30 से अधिक महत्वपूर्ण कार्यालय संचालित होंगे। इस एकीकरण से न केवल सरकारी कामकाज में तेजी आएगी, बल्कि आम नागरिकों का समय और संसाधन भी बचेंगे।
नए परिसर को आधुनिक जरूरतों और स्मार्ट सिटी के मानकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। यहां पार्किंग की बड़ी समस्या को हल करने के लिए 345 ईसीएस (Equivalent Car Space) मल्टी-लेवल पार्किंग और 112 ईसीएस स्टिल्ट पार्किंग की व्यवस्था होगी। इसके अलावा, 160 से अधिक दोपहिया वाहनों के लिए भी अलग स्टैंड बनाया जाएगा। भवन में एनआईसी (NIC) कार्यालय, ई-गवर्नेंस सोसाइटी और आधुनिक मीटिंग हॉल जैसी सुविधाएं भी होंगी, जो इसे पूरी तरह 'पेपरलेस' और 'स्मार्ट' वर्किंग कल्चर के अनुकूल बनाएंगी।
प्रशासनिक भवन के निर्माण के साथ ही आसपास की यातायात व्यवस्था को भी दुरुस्त किया जाएगा। यातायात प्रबंधन के लिए 54 मीटर चौड़ी सड़क को तीन हिस्सों में बांटने का प्रस्ताव है, जिसमें मध्य में 18 मीटर चौड़ी 6-लेन सड़क सीधे लालघाटी चौराहे तक कनेक्टिविटी देगी। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव कोहेफिजा जंक्शन पर होगा, जहाँ एक अंडरपास बनाया जाएगा। इससे नए परिसर में आने वाले वाहनों को बिना किसी बाधा के प्रवेश मिलेगा और वीआईपी मूवमेंट के दौरान भी आम जनता को जाम की समस्या से नहीं जूझना पड़ेगा।
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