
मध्य प्रदेश. प्रदेश में बाघों की सुरक्षा एक गंभीर चिंता का विषय बन गई है। पिछले 15 महीनों में प्रदेश के विभिन्न जंगलों और रिजर्व क्षेत्रों में 64 बाघों की मौत दर्ज की गई, जिनमें से 16 की मौत बिजली के करंट लगने से हुई। वन विभाग के अनुसार यह स्थिति जंगल से बाहर निकलकर गांवों और खेतों की ओर जाने वाले बाघों की संख्या बढ़ने के कारण पैदा हुई है।
विशेष रूप से मंडला और जबलपुर संभाग में कई मामलों में किसानों द्वारा फसल सुरक्षा के लिए खेतों में तारों में बिजली का करंट दौड़ाने के कारण बाघों की मौत हुई। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जनवरी 2026 में बाघों के आपसी संघर्ष में भी मौत के मामले सामने आए।
पिछले वर्ष 2025 में भी प्रदेश में 53 से अधिक बाघों की मौतें हुई थीं, जिनमें कई करंट से हुईं। वन विशेषज्ञों का कहना है कि भोजन और पानी की तलाश में जंगल से बाहर आने वाले बाघों का रिहायशी और कृषि क्षेत्रों में प्रवेश बढ़ रहा है, जिससे उनके लिए खतरा अधिक हो गया है।
वन विभाग ने कहा कि अवैध करंट लगाने पर कड़ी कार्रवाई के साथ-साथ ग्रामीणों और किसानों के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। मध्यप्रदेश वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन ने बताया कि विभाग इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष प्रयास कर रहा है।
करंट से हुई मौतों के कुछ प्रमुख मामले:
वन विभाग ने स्पष्ट किया कि जागरूकता के साथ सख्ती बढ़ाकर करंट से होने वाली बाघ हत्याओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।
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