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ट्रम्प का बड़ा दावा: '24 घंटे में खत्म हो सकती है अमेरिका-ईरान जंग'; तेहरान ने चेताया- अभी समझौता दूर है


वाशिंगटन/तेहरान. दुनिया के सबसे अशांत क्षेत्र मध्य पूर्व (Middle East) से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अगले 24 घंटों में खत्म हो सकता है। ट्रम्प के मुताबिक, तेहरान परमाणु हथियार न रखने के समझौते पर सहमत होने के "बेहद करीब" है। हालांकि, कूटनीति की इस बिसात पर ईरान के सुर थोड़े अलग नजर आ रहे हैं।

ट्रम्प की 'गाजर और छड़ी' वाली नीति

राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने चिर-परिचित अंदाज में एक तरफ शांति की उम्मीद जताई है, तो दूसरी तरफ कड़े तेवर भी दिखाए हैं। उन्होंने कहा कि "हम एक ऐतिहासिक समझौते के मुहाने पर खड़े हैं, जिससे युद्ध की आशंका खत्म हो जाएगी।" लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में यह भी स्पष्ट कर दिया कि यदि बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुँचती है, तो अमेरिका दोबारा बमबारी शुरू करने से पीछे नहीं हटेगा।

ट्रम्प का यह बयान उस समय आया है जब अमेरिकी वेबसाइट 'एक्सियोस' ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि ईरान 48 घंटे के भीतर सीजफायर के लिए राजी हो सकता है।

ईरान का पलटवार: 'अभी फैसला होना बाकी है'

ट्रम्प के दावों के विपरीत, ईरान के विदेश मंत्रालय ने इन खबरों को "अतिशयोक्ति" करार दिया है। मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि समझौते के करीब होने की बातें बढ़ा-चढ़ाकर कही जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान ने अभी तक अमेरिकी प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया है।

ईरानी संसद की विदेश मामलों की समिति के प्रवक्ता इब्राहिम रेजई ने तो यहाँ तक कह दिया कि जिसे अमेरिका 'समझौता' कह रहा है, वह असल में "अमेरिका की विशलिस्ट" (इच्छाओं की सूची) मात्र है। उनके मुताबिक, प्रस्ताव में कुछ ऐसी शर्तें शामिल हैं जिन्हें ईरान की संप्रभुता के खिलाफ माना जा रहा है।

पाकिस्तान बना 'शांति का दूत'

इस पूरे तनाव के बीच एक दिलचस्प पहलू यह है कि अमेरिका और ईरान सीधे तौर पर बात नहीं कर रहे हैं। ईरान ने पुष्टि की है कि पाकिस्तान के जरिए संदेशों का आदान-प्रदान और बातचीत जारी है। पाकिस्तान इस समय दोनों देशों के बीच एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।

क्या है विवाद की मुख्य जड़?

ईरान की मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो मुख्य पेंच परमाणु कार्यक्रम की सीमाओं और आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की समयसीमा पर फंसा हुआ है। ट्रम्प चाहते हैं कि ईरान पूरी तरह से परमाणु हथियारों की रेस से बाहर हो जाए, जबकि ईरान अपनी सुरक्षा और अर्थव्यवस्था की गारंटी चाहता है।

अब सबकी निगाहें अगले 48 घंटों पर टिकी हैं—क्या ट्रम्प अपनी 'डील-मेकिंग' स्किल से दुनिया को एक और युद्ध से बचा पाएंगे, या यह सिर्फ एक और राजनयिक गतिरोध बनकर रह जाएगा?

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