
अमेरिका. ईरान युद्ध के बाद वैश्विक राजनीति में बड़ा बयान सामने आया है। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि NATO से अमेरिका के बाहर निकलने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है।
ब्रिटिश अखबार The Telegraph को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि हालिया संकट के दौरान नाटो देशों ने अमेरिका का साथ नहीं दिया, जिससे वह बेहद नाराज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कई देशों ने न सिर्फ इस संघर्ष को अपनी लड़ाई मानने से इनकार किया, बल्कि कुछ ने अमेरिका को अपने एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की अनुमति भी नहीं दी।
ईरान युद्ध के दौरान ट्रंप ने ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस और अन्य सहयोगी देशों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में नौसेना भेजने की अपील की थी, ताकि इस अहम जलमार्ग को खोला जा सके। यह मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और इसके बंद होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल संकट गहरा गया है।
हालांकि, कई देशों ने इस मांग को ठुकरा दिया। इससे नाराज ट्रंप ने सोशल मीडिया पर भी कहा कि अमेरिका अब उन देशों की मदद नहीं करेगा, जिन्होंने संकट के समय उसका साथ नहीं दिया।
ट्रंप ने नाटो को “पेपर टाइगर” बताते हुए कहा कि यह संगठन अब कमजोर हो चुका है और यूरोपीय देश भरोसेमंद रक्षा साझेदार साबित नहीं हुए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि व्लादिमीर पुतिन भी नाटो की कमजोरियों को समझते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर अमेरिका नाटो से बाहर निकलता है तो इसके गंभीर वैश्विक प्रभाव हो सकते हैं। इससे यूरोप की सुरक्षा कमजोर हो सकती है, खासकर रूस के खिलाफ। साथ ही नाटो की सामूहिक रक्षा नीति (Article 5) भी प्रभावित हो सकती है।
हालांकि, अमेरिका का नाटो से बाहर निकलना आसान नहीं है, क्योंकि इसके लिए कांग्रेस और सीनेट की मंजूरी जरूरी हो सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
Leave A Reviews