
दोहा/वाशिंगटन. अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जारी भीषण जंग के 20वें दिन तनाव अपने चरम पर पहुँच गया है. कतर के सबसे बड़े गैस प्लांट 'रास लफान' (Ras Laffan) पर ईरान के मिसाइल हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अब तक की सबसे सख्त चेतावनी दी है.
ट्रम्प ने स्पष्ट किया है कि अगर कतर की ऊर्जा संपत्तियों पर दोबारा हमला हुआ, तो अमेरिका ईरान के सबसे महत्वपूर्ण साउथ पार्स (South Pars) गैस फील्ड को पूरी तरह तबाह कर देगा.
प्रमुख घटनाक्रम: क्यों भड़का है अमेरिका?
कतर पर हमला: ईरान ने कतर के 'रास लफान' गैस प्लांट पर कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. इस हमले में प्लांट को भारी नुकसान पहुँचा है और वहां भीषण आग लग गई.
गलतफहमी या रणनीति?: ट्रम्प का दावा है कि इजराइल ने ईरान के गैस प्लांट पर हमला किया था, जिससे बौखलाकर ईरान ने कतर को निशाना बनाया. ट्रम्प के अनुसार, कतर इस पूरी जंग में निर्दोष था.
कतर का कड़ा रुख: कतर ने ईरान के इस कदम को 'रेड लाइन' पार करना बताया है और ईरानी राजदूतों को देश छोड़ने का आदेश दे दिया है.
यूएई भी निशाने पर: ईरान ने न केवल कतर, बल्कि यूएई के 'हबशान' और 'बाब' गैस क्षेत्रों को भी निशाना बनाने की कोशिश की है, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं.
खुफिया रिपोर्ट ने खड़े किए सवाल: क्या ट्रम्प का दावा सही है?
एक तरफ जहाँ ट्रम्प ईरान के परमाणु खतरे को युद्ध का मुख्य कारण बता रहे हैं, वहीं अमेरिकी खुफिया एजेंसी (DNI) की प्रमुख तुलसी गबार्ड के बयान ने सबको चौंका दिया है.
परमाणु कार्यक्रम बंद: गबार्ड ने सीनेट में कहा कि 2025 के हमलों के बाद ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम पूरी तरह खत्म हो चुका है और उसने इसे दोबारा शुरू करने की कोई कोशिश नहीं की है.
विरोधाभास: यह रिपोर्ट राष्ट्रपति ट्रम्प के उन दावों को चुनौती देती है जिसमें उन्होंने ईरान को 'तत्काल परमाणु खतरा' बताया था.
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